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मुष्फिकुर रहीम का ऐतिहासिक 100वां टेस्ट—मिरपुर में बना भावुक माहौल, 99 पर अधूरी रही सेंचुरी की कहानी*
शेर-ए-बাংলा स्टेडियम में मुष्फिकुर के 100वें टेस्ट पर हुआ खास सम्मान, परिवार की मौजूदगी और शांत बैटिंग ने बना दिया दिन यादगार।
ढाका — मिरपुर के शेर-ए-बাংলा नेशनल स्टेडियम में बुधवार का दिन किसी त्योहार से कम नहीं था। हवा में मिठास थी, स्टैंड्स में चमक थी, और मैदान पर इतिहास लिखा जा रहा था—क्योंकि यह दिन था मुष्फिकुर रहीम के शानदार करियर का 100वां टेस्ट मैच।
बांग्लादेश क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद और अनुशासित खिलाड़ी को उनके पहले कप्तान हबीबुल बशार ने एक नई कैप पहनाकर सम्मानित किया। टीममेट्स उनके पीछे खड़े थे, परिवार उनके पास था, और स्टेडियम में लगे बड़े-बड़े बैनर उनके लंबे सफर को सलाम कर रहे थे। सिर्फ 10 मिनट का कार्यक्रम, लेकिन भावनाओं से भरा हुआ।
100वें टेस्ट की सुबह—चमक, सम्मान और एक शांत मुस्कान
सुबह की हल्की ठंडक दोपहर की गर्म धूप में बदलने लगी, लेकिन मुष्फिकुर के चेहरे पर वही पुरानी गंभीरता और सादगी थी। वह खिलाड़ी जो शोर से ज़्यादा अनुशासन पर यकीन करता है, वह माहौल में बसी चमक से थोड़ा अलग-थलग दिख रहा था—जैसे हमेशा की तरह खेल को ही प्राथमिकता दे रहा हो।
लंच से पहले बांग्लादेश के तीन विकेट गिर चुके थे, और मुष्फिकुर को उम्मीद से जल्दी बल्लेबाज़ी करने आना पड़ा।
लेकिन जैसे ही वे क्रीज़ पर उतरे, 12 साल पुराने साथी मोमिनुल हक़ ने उसी शांत, संयमित और मजबूत मुष्फिकुर को देखा, जिसे वह शुरुआत से जानते हैं।
99 पर रुक गई सेंचुरी—लेकिन घबराहट नहीं, बस धैर्य*
दिन खत्म होते-होते मुष्फिकुर 99* पर अटके रह गए। आयरलैंड ने आखिरी आधे घंटे में खेल को धीमा किया ताकि 90 ओवर पूरे हो जाएँ और एक अतिरिक्त ओवर ना फेंकना पड़े। लेकिन नर्वस? बिल्कुल नहीं।
मोमिनुल हक़ ने मैच के बाद कहा:
“अगर ये कोई और खिलाड़ी होता तो मैं चिंतित होता। लेकिन हम बात कर रहे हैं मुष्फिकुर रहीम की—जिसने शतक, दोहरे शतक बनाए हैं। वह कल इसे पूरा कर देगा।”
उन्होंने मज़ाक में यह भी कहा कि होटल में मुष्फिकुर से बात करने से डरने वाले दिन अब चले गए—
“अब तो हम उनसे ज़्यादा मज़ाक करते हैं।”

अनुशासन—20 साल के करियर की असली रीढ़
मुष्फिकुर की क़ामयाबी सिर्फ उनकी तकनीक में नहीं, बल्कि उनके अनुशासन में है।
सुबह जल्दी उठना, तय रूटीन, अभ्यास में गंभीरता, और मैदान पर शांत रहना—इन्हीं आदतों ने उन्हें 100 टेस्ट तक पहुँचाया है।
इसलिए जब स्टेडियम में बड़े-बड़े बैनर लगे, या परिवार के सामने सम्मान समारोह हुआ—यह सब उनके सामान्य प्री-मैच रूटीन के उलट था।
लेकिन मुष्फिकुर ने सबकुछ शांत मन से स्वीकार किया—जैसे वह हर स्थिति को खेल के हिस्से की तरह लेते हैं।
टीम के लिए संकटमोचक—आज भी वही भरोसा
जब टीम जल्दी-जल्दी विकेट खो रही थी, तब मोमिनुल को यह देखने की खुशी हुई कि मुष्फिकुर मौके को कितना अच्छी तरह समझ रहे थे।
“वे स्थिति के हिसाब से बल्लेबाजी कर रहे थे। आयरलैंड हमारी सहनशक्ति की परीक्षा ले रहा था, इसलिए हमने भी धैर्य रखा।”
धीमी आउटफील्ड और रक्षात्मक फील्डिंग के बीच मुष्फिकुर ने टीम को संभाला और दिन के अंत तक नाबाद रहे—99 पर।
एक नया दौर—BCB द्वारा खिलाड़ियों का सम्मान
मोमिनुल हक़ ने यह भी कहा कि उन्होंने बांग्लादेश में इससे पहले किसी खिलाड़ी के 100वें टेस्ट पर ऐसा सम्मान नहीं देखा।
यह माहौल उन्हें किसी रिटायरमेंट समारोह जैसा लगा—लेकिन फिर एहसास हुआ कि यह एक जश्न है, एक नई शुरुआत।
उनका मानना है कि
“अगर खिलाड़ियों को ऐसे सम्मान मिलेंगे, तो युवा पीढ़ी 100 टेस्ट खेलने का सपना ज़रूर देखेगी।”
स्टेडियम की हवा—एक दिन के लिए बदल गया पूरा माहौल
ढाका का यह ऐतिहासिक मैदान पिछले कुछ सालों से विवादों और आलोचनाओं का केंद्र रहा है।
लेकिन बुधवार को माहौल बदला हुआ था—कोई शोर नहीं, कोई गुस्सा नहीं, बस क्रिकेट और सम्मान।
कई सालों बाद लग रहा है कि जब गुरुवार सुबह खेल शुरू होगा, तो मिरपुर में एक अच्छी भीड़ देखने को मिलेगी—शायद सिर्फ इसलिए कि वे देख सकें कैसे बांग्लादेश का सबसे अनुशासित खिलाड़ी अपना 100वां टेस्ट, अपनी 100वीं रन, अपनी 100% समर्पित यात्रा पूरी करता है।
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