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De De Pyaar De 2 Review: अजय देवगन की फिल्म में असली शोस्टॉपर बने आर. माधवन, लव रंजन की कहानी हुई मैच्योर
सीक्वल में रोमांस से ज्यादा चमकते हैं रिश्तों की उलझनें, माधवन का ‘प्रोटेक्टिव डैड’ दिल चुरा लेता है
किसी भी बॉलीवुड सीक्वल पर सबसे बड़ा सवाल यही रहता है—क्या यह पहले भाग की चमक को दोहरा पाएगा?
De De Pyaar De 2 इस मामले में आधा-आधा स्कोर करती है।
जहाँ अजय देवगन और रकुल प्रीत सिंह की जोड़ी पहली फिल्म की तरह सहज और प्यारी लगती है, वहीं इस बार कहानी का केंद्र बदलकर आर. माधवन पर आ जाता है—और सच कहें तो यह बदलाव फिल्म को और दिलचस्प बना देता है।
पहली फिल्म ने 50-प्लस अश्विन (अजय देवगन) और 26 साल की आयशा (रकुल प्रीत) की अनोखी प्रेम कहानी को बेहद सहजता से पेश किया था।
सीक्वल वहीं से कहानी उठाता है जहाँ 2019 में खत्म हुई थी।
लेकिन इस बार परिवारों की दुनिया, खासकर आयशा के माता-पिता, कहानी का मुख्य टकराव बन जाते हैं।
आर. माधवन—फिल्म के ‘सीन स्टीलर’, जिन्होंने हर फ्रेम चमका दिया
इस बार स्क्रीन पर सबसे ज़्यादा चमकते हैं राजजी खुराना यानी आर. माधवन।
उनका किरदार एक ऐसे पिता का है जो अपनी बेटी को किसी भी गलत फैसले से बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है।
उनकी आंखों में चिंता, चेहरे पर सख़्ती और दिल के अंदर का संघर्ष—सब कुछ इतना ईमानदारी से निकलकर आता है कि आप कहानी के हर मोड़ पर उनके साथ हो जाते हैं।
माधवन की एंट्री से ही फिल्म का टोन बदल जाता है।
कई सीन्स में वह अजय देवगन पर भारी पड़ते दिखते हैं, ठीक वैसे ही जैसे दोनों ने Shaitaan में स्क्रीन शेयर की थी।
कहानी: रिश्तों की जटिलता, हास्य और पारिवारिक टकराव का मिश्रण
फिल्म की कहानी ऐसी है जिसमें “उम्र के अंतर वाले रिश्ते” के ऊपर समाज और परिवार का प्रेशर क्लियर दिखाई देता है।
- आयशा के माता-पिता की परेशानी—एक 50+ पार्टनर को स्वीकारना
- अजय देवगन का संघर्ष—अपने रिश्ते की सच्चाई पर अडिग रहना
- परिवारों का एहसास—आखिर प्यार उम्र नहीं देखता
कई मज़ेदार और कई भावुक पल फिल्म को ऊपर उठाते हैं।
हालांकि बीच-बीच में कहानी खिंच जाती है, और कुछ सीक्वेंस पिछले भाग जैसा ताजापन नहीं ला पाते।

लव रंजन की राइटिंग—अब ज़्यादा मैच्योर, कम विवादित
‘लव रंजन स्टाइल’ वाला तीखा रोमांस और रिश्तों की चुटकीभरी कहानी इस फिल्म में भी है, लेकिन इस बार लेखन में ज़्यादा परिपक्वता दिखती है।
संवादों में गहराई है और रिश्तों की असहजता को बिना ओवरड्रामेटिक बने दिखाया गया है।
परफॉर्मेंस स्कोरकार्ड
- अजय देवगन – स्थिर, शांत और परफेक्ट ‘गिल्ट-फ्री’ लवर
- रकुल प्रीत सिंह – इस भाग में कम स्पेस, लेकिन स्क्रीन पर स्वाभाविक
- आर. माधवन – फिल्म की जान
- जावेद जाफरी – हल्के-फुल्के हास्य का बढ़िया तड़का
- मीज़ान जाफरी – ठीक-ठाक, कहानी में सीमित योगदान
कुल मिलाकर—क्या देखनी चाहिए फिल्म?
अगर आपने De De Pyaar De (2019) पसंद की थी, तो इसका सीक्वल आपको निराश नहीं करेगा।
ह्यूमर, रिश्तों का तनाव, और माधवन-अजय के बीच के टकराव—ये सब फिल्म को मनोरंजक बनाते हैं।
हाँ, कहानी कई जगह लंबी लगती है, लेकिन आर. माधवन की परफॉर्मेंस इस कमी को पूरा कर देती है।
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