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तुम लड़कियों ने कभी कुछ जीता है?’ – हरमनप्रीत कौर की वर्ल्ड कप जीत ने बदला महिलाओं के क्रिकेट का नजरिया
हरमनप्रीत कौर की टीम इंडिया ने नवी मुंबई में इतिहास रचकर उन सभी आवाज़ों को खामोश कर दिया जिन्होंने कभी महिलाओं के क्रिकेट को हल्के में लिया था
भारत की महिला क्रिकेट टीम ने DY पाटिल स्टेडियम, नवी मुंबई में वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया। यह जीत सिर्फ़ एक ट्रॉफी नहीं थी — यह उन सभी पीढ़ियों के संघर्ष की जीत थी जिन्होंने पहचान, सम्मान और बराबरी के लिए सालों तक लड़ाई लड़ी।
टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने जीत के अगले दिन सोशल मीडिया पर एक सशक्त संदेश साझा किया। पहली नज़र में उनकी पोस्ट एक सामान्य ‘विनिंग मोमेंट’ जैसी लग रही थी, लेकिन उनकी टी-शर्ट पर लिखे शब्दों ने सबका ध्यान खींच लिया —

“Cricket is a gentleman’sEVERYONE’Sgame.”
‘Gentleman’s’ शब्द को काटकर उन्होंने दुनिया को बता दिया कि क्रिकेट अब सिर्फ़ पुरुषों का नहीं, बल्कि सभी का खेल है।
2017 की हार और वो सवाल – “तुम लड़कियों ने क्या जीता है?”
टीम इंडिया की पूर्व बल्लेबाज पूनम राऊत ने The Times of India को दिए इंटरव्यू में 2017 के वर्ल्ड कप फाइनल की यादें ताज़ा कीं। उस मैच में भारत सिर्फ़ 9 रन से इंग्लैंड से हार गया था। राऊत ने बताया कि उस हार के बाद उन्हें और उनकी साथियों को समाज से कैसी बातें सुननी पड़ीं —
“लोग कहते थे – ‘तुमने क्या कर लिया? कभी कुछ जीता है? लड़कियाँ क्रिकेट खेल सकती हैं क्या?’”
उन्होंने कहा कि उस समय ये बातें उन्हें अंदर तक झकझोर देती थीं। लेकिन 2025 की जीत ने सब कुछ बदल दिया — “अब हमने सबको जवाब दे दिया है।”
हरमनप्रीत की कप्तानी – जवाब उन सबको जिन्होंने कभी शक किया
इस बार की वर्ल्ड कप टीम में 2017 की टीम से सिर्फ़ तीन खिलाड़ी थीं — हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना, और दीप्ति शर्मा। इन तीनों ने मिलकर वो सपना पूरा किया जो लाखों भारतीय लड़कियों ने देखा था।
राऊत ने कहा,
“मैं बहुत भावुक हूं। 2017 की हार के बाद सालों तक वो दर्द रहा। पर अब वो दर्द गर्व में बदल गया है। हरमन ने वही कर दिखाया जो हम सब चाहते थे।”
“हम साबित कर चुके हैं कि लड़कियाँ भी खेल सकती हैं”
पूनम राऊत ने बताया कि अपने शुरुआती दिनों में उन्हें लड़कों से ताने सुनने पड़े —
“मैं जब खेलती थी, तो लड़के कहते थे – ‘लड़कियाँ क्रिकेट खेल सकती हैं क्या?’ मैं छोटी थी, गुस्सा भी आता था, लेकिन कह नहीं पाती थी। तब मैंने ठान लिया था कि एक दिन दुनिया को दिखाऊंगी कि हम भी क्रिकेट खेल सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि हरमनप्रीत कौर की जीत उसी सोच का विस्तार है —

“वो भी यही सोचती हैं कि क्रिकेट सबका है, सिर्फ़ पुरुषों का नहीं। उनकी टी-शर्ट का संदेश हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है जिसे कभी कहा गया कि तुम नहीं कर सकती।”
9 साल बाद मिटा दर्द
2017 के फाइनल की हार का दर्द राऊत और उनकी पीढ़ी के लिए हमेशा एक अधूरा सपना रहा। उन्होंने कहा,
“9 रन से हारना वो घाव था जो भर नहीं पा रहा था। लेकिन इस बार हरमन ने वो जख्म भर दिया। अब लगता है कि हमारी मेहनत बेकार नहीं गई।”
भारत की इस जीत ने सिर्फ़ एक कप नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय महिलाओं के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। और अब कोई यह कहने की हिम्मत नहीं करेगा — “लड़कियाँ क्या खेल सकती हैं?”
