Cricket
धोनी के इस सबसे बड़े फैन ने रांची में बसाई माही की दुनिया जर्सी से लेकर जन्मदिन तक हर पल है सिर्फ MSD के नाम
बिहार से रांची आए सुबोध ने 13 साल से धोनी को ही बना लिया जीवन का केंद्र आज फार्महाउस के बगल में चला रहे हैं ‘खुशमाही’ ट्रेनिंग सेंटर
भारत के पूर्व कप्तान और क्रिकेट आइकन महेंद्र सिंह धोनी का जन्मदिन हर साल उनके फैंस के लिए किसी त्योहार से कम नहीं होता। लेकिन रांची के एक फैन की कहानी बाकी सबसे अलग है। बिहार के हाजीपुर से आए सुबोध कुशवाहा ने अपने जीवन के 13 साल सिर्फ माही के नाम कर दिए। उनके लिए धोनी खिलाड़ी नहीं, भगवान हैं—जिनसे जुड़ने के लिए उन्होंने अपना सब कुछ छोड़ दिया और रांची में एक नई शुरुआत की।
हर सुबह होती है माही के दर्शन से
सुबोध का कमरा किसी मंदिर से कम नहीं। हरमू रोड स्थित किराए के कमरे की दीवारों पर धोनी के पोस्टर, तस्वीरें, और ऑटोग्राफ वाली जर्सी लगी हैं। सुबोध कहते हैं, “मेरी सुबह तभी होती है जब मैं माही को देख लेता हूं। वो मेरे लिए प्रेरणा हैं, विश्वास हैं, मेरी ताकत हैं।”
क्रिकेट छोड़, बच्चों को बना रहे माही जैसा
धोनी की ही तरह सुबोध ने भी क्रिकेट खेलना शुरू किया और ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों के साथ टूर्नामेंट्स खेले। हालांकि टीम इंडिया तक पहुंचना संभव नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब वह रांची के सिमलिया में ‘खुशमाही’ क्रिकेट ट्रेनिंग सेंटर चलाते हैं—और खास बात ये कि यह सेंटर माही के फार्म हाउस के बगल में है।
सुबोध मानते हैं कि धोनी भले ही रोज़ सामने न हों, लेकिन उनकी सोच, उनका अनुशासन और प्रेरणा हर बच्चे तक पहुंचे—यही उनका मिशन है।
2021 में पूरी हुई बरसों की आराधना
साल 2021 सुबोध के लिए सपना सच होने जैसा था। पहली बार उन्हें MS Dhoni से मुलाकात का मौका मिला। इसके बाद उनके रिश्ते में गहराई आई। दुबई में जब IPL हो रहा था, तब धोनी ने मोनू कुमार के ज़रिए उन्हें एक ऑटोग्राफ की हुई जर्सी भेजी। सुबोध कहते हैं, “वो सिर्फ जर्सी नहीं थी, माही का आशीर्वाद था।”
सपना है जन्मदिन माही के साथ मनाने का
हर साल 7 जुलाई को सुबोध माही का जन्मदिन मनाते हैं, केक काटते हैं, बच्चों के साथ खास कार्यक्रम रखते हैं। लेकिन उनके दिल में एक ही ख्वाहिश है—कभी धोनी के साथ केक काट सकें, एक बार जन्मदिन साथ मना सकें।
उनके जूनियर क्रिकेटर्स भी मानते हैं कि सुबोध की माही के लिए दीवानगी सच्ची श्रद्धा है। हर ट्रेनिंग में वह धोनी के खेल, सोच और विनम्रता का उदाहरण देकर बच्चों को सिखाते हैं।
सुबोध की कहानी सिर्फ फैन की नहीं, साधना की मिसाल है
सुबोध की ज़िंदगी उस प्रेम और जुनून की मिसाल है जो इंसान को कुछ भी कर गुजरने की ताकत देता है। जब एक फैन की भक्ति इतनी सच्ची हो कि खुद माही भी उसे पहचानने लगें, तो वह सिर्फ दीवानगी नहीं, एक जीवन की साधना बन जाती है।
