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15 करोड़ की किताब! पटना बुक फेयर में दिखी दुनिया की सबसे महंगी रचना—आख़िर इसमें ऐसा क्या है?
पटना पुस्तक मेले में एक अनोखी किताब ने सबका ध्यान खींचा—सिर्फ 3 कॉपीज़ वाली यह दुर्लभ रचना 15 करोड़ रुपये क्यों कीमत रखती है? जानें इसके पीछे की अद्भुत कहानी
पटना पुस्तक मेले में इस बार एक ऐसी किताब ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जिसकी कीमत सुनकर लोग हैरान रह गए—पूरी 15 करोड़ रुपये!
यह किताब बेहद दुर्लभ है और दिलचस्प बात यह है कि इसकी दुनिया में केवल 3 ही कॉपीज़ मौजूद हैं।
मेला घूमने आए लोग जब इस किताब के बारे में जान रहे थे, तो सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने लगा। मेले में मौजूद लोग भी यह सोचने पर मजबूर हो गए कि एक किताब की कीमत 15 करोड़ कैसे हो सकती है? आखिर इसमें ऐसा क्या लिखा है?
क्या है इस 15 करोड़ की किताब में?
वायरल वीडियो में बताया गया कि यह किताब लेखक की एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन करती है।
लेखक ने दावा किया कि उन्हें 6–7 सितंबर 2006 के दौरान ऐसा आध्यात्मिक अनुभव हुआ, जिसने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया।
इसी अनुभव को उन्होंने “महाशून्य यात्रा” नाम दिया।
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किताब की सबसे ख़ास बात यह है कि:
- लेखक ने इसे 408 पन्नों में
- केवल 3 घंटे 24 मिनट में लिखा
ये तथ्य ही इसे बेहद अलभ्य और अनमोल बनाते हैं।
क्यों है यह किताब इतनी महंगी?
लेखक के अनुसार, यह रचना किसी सामान्य पुस्तक जैसी नहीं है बल्कि:
- यह आध्यात्मिक जागरण का विस्तृत अनुभव है
- किताब की प्रसंस्करण प्रक्रिया बेहद कठिन और अनोखी रही
- दुनिया में इसकी केवल 3 कॉपीज़ छापी गईं
- इसे बनाने में उपयोग हुई सामग्री भी अत्यधिक कीमती बताई जाती है
इसके चलते इसे दुनिया की सबसे महंगी किताबों में से एक माना जा रहा है।
कई पाठक इस किताब को “दुर्लभ ज्ञान का संग्रह” बताते हुए इसके मूल्य को जायज़ मानते हैं, जबकि कई लोग इसे “अविश्वसनीय” कह रहे हैं।
लेखक कौन हैं?
हालांकि किताब के लेखक का नाम वायरल वीडियो में स्पष्ट नहीं बताया गया, लेकिन मेले के आयोजकों के मुताबिक वे लंबे समय से आध्यात्मिक अनुसंधान से जुड़े हुए हैं।
उनकी यह रचना मानव मन और चेतना की गहराई में उतरकर लिखी गई है, जो वजह है कि पाठकों में इसके प्रति इतनी जिज्ञासा पैदा हो रही है।

मेले में लोगों की प्रतिक्रिया—हैरानी, उत्सुकता और प्रशंसा
किताब देखने आए लोगों की प्रतिक्रियाएँ भी काफी दिलचस्प रहीं:
- किसी ने कहा—“जिंदगी में पहली बार इतनी महंगी किताब देखी।”
- एक बुज़ुर्ग पाठक बोले—“अगर इसमें आध्यात्मिक सत्य है तो कीमत मायने नहीं रखती।”
- युवाओं ने इसे “माइंड-ब्लोइंग” बताया।
सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने इस किताब को लेकर मीम्स भी बनाए, लेकिन जिज्ञासा और चर्चा दोनों तेजी से बढ़ीं।
क्या यह किताब आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस किताब की केवल तीन कॉपी ही छापी गई थीं।
इसलिए इसके व्यावसायिक संस्करण आने की संभावना बहुत कम है।
लेकिन मेले में चर्चा है कि भविष्य में शायद इसका डिजिटल या एडिटेड संस्करण आम पाठकों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
43 अध्यायों में बंधा आध्यात्मिक अनुभव
किताब में कुल 43 अध्याय हैं।
हर अध्याय एक अलग मानसिक और आध्यात्मिक अवस्था का वर्णन करता है—
एक ऐसी “Inner Journey” जिसे लेखक का दावा है कि सामान्य मनुष्य शायद ही कभी अनुभव कर पाता हो।
इसीलिए इसकी सामग्री को
“आत्मा की यात्रा का दस्तावेज़”
भी कहा जा रहा है।
