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शुभमन गिल के 269 पर यूवराज और योगराज का दर्द इतना बड़ा स्कोर बनाकर आउट होना क्रिकेट का अपराध है
एजबेस्टन में टीम इंडिया के कप्तान ने जड़ा 269 रन लेकिन 300 से चूकने पर बोले पूर्व ऑलराउंडर –सचिन खुद को डांटते थे, गिल को भी सीखना होगा
एजबेस्टन टेस्ट के दूसरे दिन जब भारत के नए कप्तान शुभमन गिल ने 269 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली, तो पूरा देश उनकी क्लासिक बल्लेबाज़ी का दीवाना हो गया। लेकिन वहीं, एक वर्ग ऐसा भी था जो इस शानदार पारी के बावजूद अंदर से ‘पीड़ा’ महसूस कर रहा था — और वो थे भारत के पूर्व ऑलराउंडर यूवराज सिंह और उनके पिता योगराज सिंह।
दरअसल शुभमन गिल ने जब 200 पार किए और फिर 250 भी पार कर गए, तो लग रहा था कि वह अपने टेस्ट करियर का पहला तिहरा शतक जरूर जड़ेंगे। भारत का स्कोर था 564/7 और गिल थे 269 पर नाबाद। लेकिन तभी इंग्लिश खिलाड़ी हैरी ब्रुक ने माइंड गेम खेलते हुए कुछ कहा 290 के आसपास पहुंचने दो। गिल ने मुस्कुरा कर जवाब तो दिया लेकिन अगले ही ओवर में आउट हो गए।
पूर्व तेज गेंदबाज योगराज सिंह ने इस मौके पर भावनात्मक बयान देते हुए कहा जब कोई बल्लेबाज़ 200 पर नाबाद होता है, तो उसकी हर गलती छुप जाती है। गिल को 300 तक पहुंचना चाहिए था। इतने बड़े स्कोर के बाद आउट होना अपराध है। यूवराज भी यही महसूस कर रहा है।
गौरतलब है कि गिल अभिषेक शर्मा और अर्शदीप सिंह तीनों ने यूवराज सिंह की कोचिंग में काफी समय बिताया है। योगराज का कहना है कि उनके बेटे ने क्रिकेट से जो कुछ भी कमाया, वह अब उसे अगली पीढ़ी को वापस दे रहे हैं। यूवी इन खिलाड़ियों को निखार रहे हैं और जब इनमें से कोई चूकता है, तो उन्हें भी उतना ही दुःख होता है।”
योगराज सिंह ने यह भी याद दिलाया कि महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर खुद को तब तक माफ नहीं करते थे जब तक वह अपनी गलतियों से सबक न ले लें। सचिन खुद को डांटते थे। सुनील गावस्कर भी तब तक संतुष्ट नहीं होते थे जब तक गलती सुधार न लें। यही बात गिल को भी सीखनी होगी।
भारत के कप्तान के तौर पर यह गिल की पहली बड़ी पारी थी और इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्होंने आलोचकों का मुंह बंद कर दिया है। लेकिन अब सवाल उठता है कि क्या इस चूक से वह सीख लेकर भविष्य में और भी मजबूत होकर लौटेंगे?
भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी का चेहरा बन चुके शुभमन गिल के लिए यह सिर्फ एक शानदार पारी नहीं थी, बल्कि एक जिम्मेदारी भरा संदेश भी था — कि अब उन्हें हर मौके को भुनाना है, क्योंकि सिर्फ प्रतिभा नहीं, निरंतरता ही उन्हें दिग्गज बनाएगी।
