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ईरान वार्ता के लिए JD Vance ही क्यों? पर्दे के पीछे की कूटनीति आई सामने
इस्लामाबाद में ऐतिहासिक बातचीत से पहले अमेरिका ने चुना ‘कम टकराव वाला चेहरा’, ईरान को भी वेंस पर ज्यादा भरोसा
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इस्लामाबाद में हो रही अमेरिका-ईरान वार्ता सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं, बल्कि कई रणनीतिक फैसलों का नतीजा है। सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वह है—आखिर अमेरिका ने इस अहम बातचीत के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को ही क्यों चुना?
सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के पीछे एक दिलचस्प कूटनीतिक कहानी छिपी है। बताया जा रहा है कि ईरान के कुछ प्रभावशाली नेताओं ने खुद वेंस को बातचीत में शामिल करने की इच्छा जताई थी। उनके मुताबिक, वेंस अमेरिका की राजनीति में उन गिने-चुने चेहरों में से हैं, जिन्हें अपेक्षाकृत “युद्ध विरोधी” माना जाता है।
दरअसल, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा था, तब वेंस ने खुलकर युद्ध के खिलाफ अपनी राय रखी थी। यही वजह है कि तेहरान को लगता है कि वेंस बातचीत को टकराव की बजाय समाधान की दिशा में ले जा सकते हैं।
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इस्लामाबाद में होने वाली यह मुलाकात ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि 1979 के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के शीर्ष नेता आमने-सामने बैठकर इतने बड़े स्तर पर चर्चा कर रहे हैं। वेंस यहां ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात करेंगे।
अमेरिकी टीम में वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। हालांकि, ईरान के भीतर इन दोनों को लेकर भरोसा कम बताया जा रहा है। पिछले वार्ताओं के असफल होने का जिम्मेदार भी इन्हें ही माना जाता है।

विश्लेषकों का मानना है कि वेंस का शांत और संतुलित रवैया इस बातचीत में अहम भूमिका निभा सकता है। जहां एक ओर वे ट्रंप प्रशासन का हिस्सा हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने कई बार सैन्य कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठाए हैं। यही दोहरी छवि उन्हें एक “संभावित शांति दूत” बनाती है।
इस पूरी वार्ता के पीछे एक बड़ा राजनीतिक दांव भी छिपा है। अगर यह बातचीत सफल होती है, तो वेंस की छवि एक मजबूत कूटनीतिक नेता के रूप में उभर सकती है, जो भविष्य में उन्हें अमेरिकी राजनीति में और आगे ले जा सकती है। वहीं, असफलता की स्थिति में यह उनके करियर पर भी असर डाल सकती है।
फिलहाल, दो हफ्तों के संघर्षविराम के बीच यह बातचीत उम्मीद की एक किरण बनकर उभरी है। अब देखना यह है कि क्या वेंस इस जटिल समीकरण को सुलझा पाते हैं या फिर हालात एक बार फिर तनाव की ओर बढ़ते हैं।
