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मैं इसे नशे में ही निभाऊंगा’ – जब 99 के सेट पर Vinod Khanna ने चौंका दिया था Raj और deke ko
राज और डीके ने किया खुलासा, पहली ही फिल्म में विनोद खन्ना का अंदाज़ देखकर घबरा गए थे मेकर्स
हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिनका नाम ही अपने आप में एक स्कूल की तरह रहा है। Vinod Khanna उन्हीं में से एक थे। पर्दे पर उनकी मौजूदगी, आवाज़ और बॉडी लैंग्वेज आज भी दर्शकों को याद है। अब उनकी एक ऐसी याद सामने आई है, जिसने फिल्मी गलियारों में फिर से हलचल मचा दी है।
फिल्ममेकर जोड़ी Raj and DK ने हाल ही में अपनी पहली हिंदी फीचर फिल्म 99 के सेट से जुड़ा एक किस्सा साझा किया, जिसने यह दिखा दिया कि विनोद खन्ना अपने किरदारों को कितनी शिद्दत से जीते थे।
सिर्फ दो दिन, और बड़ा दबाव
राज और डीके ने बताया कि फिल्म 99 के लिए उन्हें विनोद खन्ना सिर्फ दो दिनों के लिए मिले थे। वह उस समय अपने निजी और पेशेवर जीवन में काफी व्यस्त थे। राज के मुताबिक, पहले ही दिन सेट पर एक अजीब सा डर था।
राज ने याद करते हुए कहा,
“हम सब इंतज़ार कर रहे थे और अंदर से घबराए हुए थे। मन में यही चल रहा था कि इतने बड़े अभिनेता को डायरेक्ट कैसे करेंगे? ‘विनोद खन्ना को डायरेक्ट करना’ – ये शब्द ही भारी लगते थे।”
जब विनोद खन्ना ने कहा – मैं थोड़ा टिप्सी हूं
जब दोनों निर्देशक उनके कमरे में गए और सीन समझाया, तब उन्हें एक अलग ही सरप्राइज़ मिला। राज के अनुसार,
“हमने सीन बताया और तभी महसूस हुआ कि वो थोड़े टिप्सी थे।”
इसके बाद जो हुआ, वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। विनोद खन्ना ने बेहद सहजता से कहा कि उनका किरदार नशे में है, और वह उसे वैसा ही निभाना चाहते हैं।
यानि अभिनय सिर्फ कैमरे के सामने नहीं, बल्कि पूरी तरह उस किरदार में उतरकर।
कैमियो जो आज भी यादगार है
99 में विनोद खन्ना का रोल लंबा नहीं था, लेकिन उनका किरदार आज भी दर्शकों को हंसाता है। उनका यह एक्सटेंडेड कैमियो फिल्म की जान बन गया। कॉमिक टाइमिंग, बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी – सब कुछ इतना नेचुरल था कि किसी को अंदाज़ा तक नहीं हुआ कि वह सिर्फ दो दिनों की शूटिंग का नतीजा है।
नई पीढ़ी के लिए सीख
राज और डीके का मानना है कि विनोद खन्ना जैसे कलाकार नई पीढ़ी के फिल्ममेकर्स के लिए एक बड़ी सीख थे। बिना किसी स्टार नखरे के, वह कहानी और किरदार को प्राथमिकता देते थे। शायद यही वजह है कि आज भी उनका काम समय के साथ फीका नहीं पड़ा।
यह किस्सा सिर्फ एक मज़ेदार याद नहीं, बल्कि उस दौर के कलाकारों की प्रोफेशनल ईमानदारी और कला के प्रति जुनून की झलक भी देता है।
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