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लियोनेल मेसी की जादुई असिस्ट से अर्जेंटीना ने प्यूर्टो रिको को 6-0 से रौंदा
लौटते ही चमके मेसी, दी दो शानदार असिस्ट — मैक एलिस्टर और लाउटारो ने लगाए दो-दो गोल, अर्जेंटीना का शानदार प्रदर्शन
फ्लोरिडा के चेस स्टेडियम में खेले गए इंटरनेशनल फ्रेंडली मुकाबले में अर्जेंटीना ने प्यूर्टो रिको को 6-0 के विशाल अंतर से मात देकर अपनी वर्ल्ड कप डिफेंडिंग तैयारियों का जोरदार ऐलान कर दिया। कप्तान लियोनेल मेसी ने भले ही खुद गोल नहीं किया, लेकिन अपनी दो शानदार असिस्ट से दर्शकों का दिल जीत लिया।
पहले ही मिनट से अर्जेंटीना ने खेल पर अपना दबदबा बना लिया था। एलेक्सिस मैक एलिस्टर ने मैच के 14वें मिनट में पहला गोल दागा, और 36वें मिनट में एक और गोल कर अपनी डबल हिट पूरी की। वहीं गोंजालो मॉन्टिएल ने 23वें मिनट में मेसी की जादुई पास पर शानदार वॉली मारकर दूसरा गोल किया।
पहले हाफ में अर्जेंटीना ने तीन गोल की बढ़त बना ली थी और एमिलियानो मार्टिनेज की निगरानी में डिफेंस ने प्यूर्टो रिको को कोई मौका नहीं दिया। दूसरे हाफ में भी कहानी वही रही — प्यूर्टो रिको गेंद को अपने पास रखने में नाकाम रहा और अर्जेंटीना ने खेल पर पूरी तरह कब्ज़ा जमाए रखा।
दूसरे हाफ के 64वें मिनट में प्यूर्टो रिको के डिफेंडर एचेवेरिया के आत्मघाती गोल ने स्कोर 4-0 कर दिया। इसके बाद लाउटारो मार्टिनेज मैदान में उतरे और आते ही दो गोल दागकर मैच को पूरी तरह अर्जेंटीना के नाम कर दिया। इनमें से एक गोल को मेसी ने खूबसूरत सेटअप किया — उन्होंने गेंद को बॉक्स के किनारे से लाउटारो की ओर बढ़ाया, जिसने शानदार फिनिशिंग के साथ गेंद को नेट में पहुंचा दिया।

अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी ने मैच के बाद कहा, “हमने इस मैच को टीम वर्क से जीता। यह दिखाता है कि टीम कितनी संतुलित है। मेसी की असिस्ट, डिफेंस की मजबूती और हर खिलाड़ी का आत्मविश्वास इस जीत की कुंजी रहा।”
प्यूर्टो रिको के लिए यह मुकाबला एक सीख साबित हुआ, क्योंकि वे अर्जेंटीना जैसी विश्व चैंपियन टीम के सामने अपना खेल दिखाने में नाकाम रहे। उन्होंने पहले हाफ में कुछ लोंग-रेंज प्रयास किए, लेकिन मार्टिनेज ने शानदार बचाव कर हर कोशिश नाकाम कर दी।
इस जीत के बाद अर्जेंटीना का मनोबल अब और ऊंचा हो गया है। टीम अगले साल यूएसए, कनाडा और मेक्सिको में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप 2026 की तैयारी के लिए अपने खिलाड़ियों को क्लब ड्यूटी पर भेजेगी।
मेसी की वापसी इस जीत का सबसे बड़ा आकर्षण रही — 38 वर्ष की उम्र में भी उनका फुटवर्क, गेम विज़न और पासिंग कमाल से कम नहीं है। उनके नेतृत्व में अर्जेंटीना ने एक बार फिर साबित किया कि क्यों वे मौजूदा विश्व चैंपियन हैं।
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