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IPL फाइनल में 13 रन डिफेंड करने वाला दो बार का चैंपियन बोला क्रिकेट को अलविदा
CSK और MI की जर्सी पहन चुके कर्नाटक के भरोसेमंद ऑलराउंडर कृष्णप्पा गौतम ने 15 साल के करियर पर लगाया विराम
भारतीय घरेलू क्रिकेट का एक शांत लेकिन मजबूत अध्याय अब बंद हो गया है। कर्नाटक के अनुभवी ऑलराउंडर Krishnappa Gowtham ने प्रोफेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। करीब 15 साल तक चले अपने करियर को उन्होंने बेंगलुरु के M. Chinnaswamy Stadium में कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के विदाई समारोह के दौरान अलविदा कहा।
37 वर्षीय गौतम ने संन्यास की वजह बेहद सादगी से बताई। उन्होंने कहा कि वह अब ऐसी जगह नहीं रोकना चाहते, जो किसी युवा खिलाड़ी के सपनों की शुरुआत बन सकती है। उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि गौतम का क्रिकेट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि जिम्मेदारी और आत्मसम्मान से भी जुड़ा रहा।
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विकेट, रन और दबाव में दमदार प्रदर्शन
कर्नाटक के लिए खेलते हुए गौतम ने खुद को एक ऐसे ऑलराउंडर के रूप में स्थापित किया, जिस पर कप्तान किसी भी हालात में भरोसा कर सकता था। उन्होंने सभी फॉर्मेट मिलाकर 394 विकेट लिए और 2,783 रन बनाए। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 59 मैचों में 224 विकेट, 14 बार पांच विकेट और दो मैचों में 10 विकेट लेना उनकी निरंतरता की गवाही देता है। बल्ले से भी उन्होंने 149 रन की यादगार पारी खेली।
लिस्ट-ए और टी20 क्रिकेट में भी गौतम की उपयोगिता कभी कम नहीं हुई। चाहे बीच के ओवरों में कसी हुई गेंदबाज़ी हो या आखिरी ओवरों में तेज रन बटोरना—गौतम हर भूमिका में फिट बैठते थे।

आईपीएल में खास पहचान
आईपीएल में कृष्णप्पा गौतम का नाम उन खिलाड़ियों में शामिल रहा, जो बड़े मंच पर दबाव से नहीं घबराते। उन्होंने Chennai Super Kings और Mumbai Indians जैसी चैंपियन टीमों की जर्सी पहनी। 2021 की नीलामी में CSK ने उन्हें 9.25 करोड़ रुपये में खरीदा था, जिससे वह उस समय के सबसे महंगे अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी बन गए थे।
गौतम का आईपीएल करियर उस फाइनल से भी याद किया जाएगा, जहां उन्होंने 13 रन डिफेंड कर टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे मौके ही किसी खिलाड़ी को ‘मैच विनर’ की पहचान दिलाते हैं।
उतार-चढ़ाव और वापसी की कहानी
गौतम का सफर आसान नहीं रहा। 2022–23 रणजी सीजन में संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने के बावजूद टीम से बाहर होना उनके लिए बड़ा झटका था। लेकिन उन्होंने इसे भी अपने करियर का हिस्सा माना—एक ऐसा दौर जिसने उन्हें मानसिक रूप से और मजबूत बनाया।
अब जब कृष्णप्पा गौतम ने क्रिकेट को अलविदा कहा है, तो वह उन खिलाड़ियों में गिने जाएंगे, जिन्होंने बिना ज्यादा शोर के भारतीय घरेलू क्रिकेट को मजबूती दी। उनका सफर युवा खिलाड़ियों के लिए एक सबक है—मेहनत, धैर्य और टीम के लिए खुद को पीछे रखना भी सफलता की पहचान हो सकती है।
