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प्रवीण गायकवाड़ पर स्याही फेंकने का मामला गरमाया बीजेपी नेता पर साजिश का आरोप
सोलापुर में कार्यक्रम के दौरान हुआ हमला, गाड़ी पर हमला, कार्यकर्ता पर मारपीट और संगठन के नाम को लेकर भड़की सियासत — प्रवीण गायकवाड़ बोले: ‘यह मेरी हत्या की कोशिश थी’
सोलापुर: मराठा संगठनों के लिए मुखर आवाज़ बन चुके प्रवीण गायकवाड़ पर हुए स्याही हमले ने महाराष्ट्र की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। घटना उस समय हुई जब गायकवाड़ फत्तेसिंह एजुकेशन इंस्टीट्यूट और सकल मराठा समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे।
जैसे ही वह बैंड-बाजे और आतिशबाज़ी के बीच कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उनके पास आकर हाथ पकड़कर चेहरे पर काली स्याही उड़ेल दी। इसके बाद दो और हमलावरों ने भी उनके चेहरे पर स्याही लगा दी। गायकवाड़ की गाड़ी का पीछा कर उसे क्षतिग्रस्त किया गया और उनके एक सहयोगी को पीटा भी गया।
हमलावरों ने जय भवानी जय शिवाजी” के नारे लगाए और संबंधित संगठन के नाम बदलने की मांग की।
कौन हैं आरोपी?
हमले की ज़िम्मेदारी शिवधर्म फाउंडेशन ने ली है। संगठन के इंदापुर अध्यक्ष दीपक काटे, जो बीजेपी युवा मोर्चा के सचिव भी हैं, को इस हमले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है।
पिछले कुछ महीनों से शिवधर्म फाउंडेशन “सांभाजी ब्रिगेड” नाम को लेकर विरोध कर रहा था, जिसे वह छत्रपति संभाजी महाराज का ‘अनौपचारिक अपमानजनक संदर्भ’ मानता है। संगठन चाहता है कि नाम बदलकर “धर्मवीर संभाजी महाराज ब्रिगेड” किया जाए।
दीपक काटे जनवरी में भी तब विवाद में आए थे जब पुणे एयरपोर्ट पर उनके बैग से कारतूस और मैगज़ीन बरामद हुए थे। तब भी संभाजी ब्रिगेड ने उन्हें लेकर जांच की मांग की थी।
प्रवीण गायकवाड़ बोले: यह हमला नहीं, मेरी हत्या की साजिश थी
गायकवाड़ ने घटना के बाद कहा कि यह सिर्फ एक स्याही हमला नहीं था, बल्कि उन्हें मारने की पूरी योजना थी। उन्होंने सवाल किया, “कार्यक्रम में पुलिस की तैनाती क्यों नहीं थी? मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस इस सुरक्षा चूक के लिए जिम्मेदार हैं।”
उन्होंने इस हमले की तुलना डॉ. नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे, एम.एम. कालबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्याओं से करते हुए कहा कि यह प्रगतिशील विचारधारा पर एक और हमला है।
विपक्ष ने साधा सरकार पर निशाना
अमोल कोल्हे (NCP शरद पवार गुट) ने कहा, “बहुजन युवाओं को जागरूक करने वाले गायकवाड़ पर हमला कायरता है। असहमति हो सकती है, हिंसा नहीं।”
जितेंद्र आव्हाड ने आरोप लगाया कि यह हमला पूर्व नियोजित था और सरकार की ‘मौन सहमति’ से हुआ है। वहीं रोहित पवार ने भी हमले की कड़ी निंदा की और कहा, “प्रवीण दादा ने बहुजन समाज के उद्यमियों को सशक्त किया है, और शायद इसी वजह से उन्हें टारगेट किया गया।”
घटना के बाद क्या हुआ?
हमले के बाद भी गायकवाड़ का सम्मान शिववक्त शिवरत्न शेठे ने किया। गायकवाड़ ने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन बाद में आंख की जांच करवाई और मीडिया से कहा कि वह सही समय पर सबके सामने आएंगे।
इस हमले ने मराठा राजनीति में एक बार फिर सांप्रदायिकता, विचारधारा और शक्ति संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह एक वैचारिक विरोध था या राजनीतिक संदेश? यह आने वाले दिनों में सामने आएगा।
