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गौतम गंभीर की टीम ने तोड़ा इंडिया का ‘होम किला’! बिना लड़ाई हार गई टेस्ट सीरीज – फैंस में गुस्सा क्यों?
गौतम गंभीर की टीम ने तोड़ा इंडिया का ‘होम किला’! बिना लड़ाई हार गई टेस्ट सीरीज – फैंस में गुस्सा क्यों?
भारतीय टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा गर्व हमेशा यह रहा है कि भारत को उसके घर में हराना दुनिया की सबसे मुश्किल चुनौतियों में से एक माना जाता था। स्टीव वॉ जैसे महान ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने भारत को “Final Frontier” कहा था, जिसे वह खुद कभी पार नहीं कर सके। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं—और बेहद तेजी से।
2025 में पहले न्यूज़ीलैंड ने भारत को 3-0 से हराया, वो भी बिना अपने स्टार बैटर केन विलियमसन के और अब दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 2-0 से करारी मात दी, जबकि उनके पास कगिसो रबाडा जैसा घातक गेंदबाज भी नहीं था।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि भारतीय टीम ने यह सीरीज लड़कर नहीं बल्कि बिना संघर्ष किए खो दी।
गौतम गंभीर पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
भारतीय टीम के नए हेड कोच गौतम गंभीर पर अब सवाल उठने लगे हैं। उन पर आरोप है कि:
टीम का कॉम्बिनेशन अस्पष्ट है
चयन में अस्थिरता है
खिलाड़ियों के रोल स्पष्ट नहीं हैं
मानसिक तैयारी बेहद कमजोर दिखी
फैंस पूछ रहे हैं:
“एक ऐसी टीम जो घर में कभी हारती नहीं थी, वो इतनी आसानी से कैसे ढह गई?”
बल्लेबाजी सबसे बड़ी कमजोरी!
भारतीय बल्लेबाजी यूनिट का हाल शर्मनाक रहा। टेस्ट क्रिकेट में सबसे जरूरी चीज है धैर्य और तकनीक, और भारतीय बल्लेबाज दोनों में नाकाम रहे।
सीरीज में:
- भारत कई बार तेज शुरुआत के बाद ढह गया
- मध्यक्रम लगातार फेल हुआ
- कोई भी बल्लेबाज बड़े स्कोर नहीं बना पाया
- मुश्किल परिस्थितियों में कोई लड़ाई नहीं दिखी
गुवाहाटी टेस्ट में भारत 95/1 से 201 ऑल आउट हो गया। यह दिखाता है कि टीम दबाव झेल नहीं पा रही।
युवा बल्लेबाजों पर भरोसा, लेकिन तैयारी कम
भारत ने कई युवा खिलाड़ियों को मौका दिया, जो लंबे समय में जरूरी है, लेकिन टेस्ट स्तर पर:
- तकनीक की कमी
- बाउंसरों से परेशानी
- रक्षात्मक खेल की कमी
स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजों ने भारत की कमजोरी पकड़ ली और बिना किसी चुनौती के भारतीय लाइन-अप को उखाड़ दिया।

टीम का रवैया भी सवालों में
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि टीम ने अंतिम दिन ही यह कह दिया:
“ड्रा भी जीत जैसा है।”
यह बयान फैन्स और पूर्व खिलाड़ियों को खटक गया। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं:
“यह भारतीय टीम की पहचान नहीं! पहले यह टीम जीतने के लिए लड़ती थी, हार मानने के लिए नहीं।”
कप्तान और कोच की सोच में अंतर?
रिपोर्ट्स के अनुसार टीम मैनेजमेंट में भी सामंजस्य की कमी दिख रही है। मैदान पर:
- रणनीति बदलती रही
- प्लानिंग स्पष्ट नहीं थी
- गेंदबाजी रोटेशन कमजोर था
- फील्ड सेटिंग में भ्रम दिखा
पूर्व क्रिकेटरों का कहना है कि:
“जब नेतृत्व अस्थिर होता है, तो टीम भी बिखर जाती है।”
दक्षिण अफ्रीका ने क्या अलग किया?
दक्षिण अफ्रीका ने:
शॉर्ट-पिच रणनीति अपनाई
मानसिक दबाव बनाया
मौके भुनाए
संयम दिखाया
और सबसे बड़ी बात—उन्होंने फाइट की।

क्या भारत का ‘होम डॉमिनेंस’ खत्म हो गया?
एक समय था जब:
- ऑस्ट्रेलिया
- इंग्लैंड
- दक्षिण अफ्रीका
- पाकिस्तान
- श्रीलंका
यहां तक कि वेस्ट इंडीज भी भारत में जीत की उम्मीद लेकर नहीं आते थे।
लेकिन अब हालात उलट गए हैं।
टीमें कह रही हैं:
“भारत में जीतना अब मुश्किल नहीं रहा।”
आगे क्या?
भारत को अब टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहचान बचानी होगी।
जरूरी कदम:
स्थिर बल्लेबाजी क्रम
स्पष्ट रणनीति
तकनीकी सुधार
मानसिक मजबूती
सही टीम चयन
अगर तुरंत बदलाव नहीं हुआ, तो भारत की टेस्ट रैंकिंग और गिर सकती है।
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