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महाराष्ट्र में Canara Bank असिस्टेंट मैनेजर ने उड़ाए ₹1.58 करोड़… CCTV की एक गलती ने खोला पूरा राज!
Bhandara के Chikhla ब्रांच में हुआ सबसे चौंकाने वाला इनसाइडर फ्रॉड, सिर्फ 24 घंटे में पुलिस ने कर लिया गिरफ्तार
महाराष्ट्र के भंडारा ज़िले में सामने आया एक ऐसा बैंक घोटाला जिसने पुलिस से लेकर आम जनता तक सबको हैरान कर दिया है। Canara Bank की Chikhla ब्रांच में तैनात 32 वर्षीय असिस्टेंट मैनेजर मयूर नेपाले ने ₹1.58 करोड़ की बड़ी चोरी की साजिश खुद रची—और खुद ही पकड़ा भी गया।
इस चोरी को नेपाले ने बाहर वालों द्वारा की गई ‘बर्गलरी’ जैसा दिखाने की कोशिश की, लेकिन उसकी एक छोटी सी गलती ने उसकी पूरी प्लानिंग को पलट दिया। पुलिस ने उसे सिर्फ 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया।
कैसे एक बैंक अधिकारी बना खुद अपनी शाखा का चोर?
पुलिस जांच में सामने आया कि नेपाले की यह प्लानिंग अचानक नहीं हुई थी। वह बीते महीनों में आर्थिक संकट से जूझ रहा था—ऑनलाइन सट्टेबाज़ी, लोन और निजी उधारी में उसका कर्ज ₹80 लाख के करीब पहुंच चुका था।
TOI की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाले ने कुछ समय पहले ही कर्नाटक में हुई ₹58 करोड़ के गोल्ड हाइस्ट से प्रेरणा ली थी। उसने ऑनलाइन ट्यूटोरियल देखकर सीखा कि सिक्योरिटी सिस्टम कैसे हैंडल किए जाते हैं और फिंगरप्रिंट या गंध जैसी पहचान कैसे मिटाई जाती है।

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17 नवंबर की रात उसने नागपुर से चार बैग खरीदे, अगले दिन बैंक पहुंचकर बिजली का कनेक्शन काटा, इंटर्नल CCTV बंद किया और डुप्लीकेट चाबी से स्ट्रॉन्गरूम खोला। फिर उसने गेट तोड़कर इसे एक फोर्स्ड-एंट्री जैसा माहौल देने की कोशिश की।
नेपाले ने कैश चेस्ट खाली किए और DVR तक निकालकर ले गया ताकि कोई फुटेज न मिले। लेकिन उसके अनुमान से बाहर एक महत्वपूर्ण कैमरा बच गया।
एक स्कूटर ने खोली उसकी पोल
नेपाले ने बैंक के अंदर सभी कैमरे बंद कर दिए थे, लेकिन बैंक के बगल वाली बिल्डिंग के बाहरी CCTV में उसकी जुपिटर स्कूटर और उसका चेहरा साफ रिकॉर्ड हो गया था।
ध्यान देने वाली बात ये भी रही कि चोरी से ठीक पहले वह ‘ट्रेनिंग’ के बहाने नागपुर गया था और फिर चोरी के बाद उसी स्कूटर पर वापस आकर जांच में शामिल होने का नाटक कर रहा था।
पुलिस ने फुटेज मिलते ही कार्रवाई तेज की और उसके घर से ₹96.12 लाख, एक Tata Nexon कार, स्कूटर और अन्य सामान बरामद कर लिया—कुल मिलाकर ₹1.07 करोड़ की रिकवरी हुई।
अंततः उसने अपराध कबूल लिया और उसे थीफ्ट, क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट और एविडेंस डिस्ट्रक्शन की धाराओं में गिरफ्तार किया गया।

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आर्थिक संकट और लत ने पहुंचाया ब्रेकिंग पॉइंट तक
नेपाले का कर्ज कई तरह का था—ऑनलाइन बेटिंग में ₹30 लाख, निजी उधारी, कार लोन, एजुकेशन लोन, डिजिटल वॉलेट लोन आदि।
पुलिस को शक है कि उसने पहले भी कुछ आर्थिक गड़बड़ियां की होंगी, जिनमें अपने पिता की ₹80 लाख FD का गलत इस्तेमाल भी शामिल है।
चौंकाने वाली बात है कि वही नेपाले जिसने बैंकिंग परीक्षा पास की थी और UPSC की तैयारी कर रहा था, वही एक गलत आदत की वजह से अपराध के दलदल में फंस गया।
सुरक्षा में भारी लापरवाही और बड़ा सबक
इस घटना ने बैंक सिक्योरिटी सिस्टम में कई कमियां उजागर की हैं—विशेषकर CCTV बैकअप और एक्सेस कंट्रोल को लेकर।
पुलिस ने Reserve Bank of India को सुझाव दिया है कि सभी बैंकों में क्लाउड-बेस्ड CCTV बैकअप अनिवार्य किया जाए ताकि कोई भी इनसाइडर आसानी से फुटेज न मिटा सके।
साथ ही, यह मामला दिखाता है कि मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव और लत कैसे किसी भी कर्मचारी को अपराध की ओर धकेल सकते हैं।
कर्मचारियों की भलाई पर ज़ोर क्यों जरूरी है?
जैसा कि The Logical Indian ने भी बताया—इस तरह के मामलों में सिर्फ कड़ी सज़ा काफी नहीं, बल्कि कर्मचारी कल्याण और फाइनेंशियल अवेयरनेस प्रोग्राम भी जरूरी हैं।
यह घटना एक सख्त चेतावनी है कि मजबूत टेक्नोलॉजी, कड़ाई से लागू सुरक्षा नियम और कर्मचारियों की नियमित काउंसलिंग ही बैंकिंग सिस्टम का भरोसा बचा सकते हैं।
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