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Bombay हाईकोर्ट का अहम फैसला, लॉ छात्र मराठी में लिख सकेगा परीक्षा, लेकिन सवालपत्र अंग्रेज़ी में ही रहेगा

कोर्ट ने दी उत्तर मराठी में लिखने की छूट, सवालपत्र मराठी में देने की मांग खारिज

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Bombay High Court Allows Law Student to Write Exam in Marathi | Dainik Diary
बॉम्बे हाईकोर्ट ने लॉ छात्र को मराठी में उत्तर लिखने की अनुमति दी, लेकिन प्रश्नपत्र अंग्रेज़ी में ही रहेगा।

भाषा और शिक्षा से जुड़े एक अहम मामले में Bombay High Court ने संतुलित रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एक प्रथम वर्ष के लॉ छात्र को अपनी एलएलबी परीक्षा मराठी भाषा में लिखने की अनुमति दे दी है, लेकिन साथ ही छात्र की यह मांग खारिज कर दी कि प्रश्नपत्र भी मराठी भाषा में उपलब्ध कराया जाए।

यह मामला उन छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, खासकर कानून जैसे तकनीकी विषय में।

क्या था पूरा मामला

याचिकाकर्ता एक प्रथम वर्ष का कानून छात्र है, जिसने अदालत में याचिका दायर कर मांग की थी कि उसे न केवल उत्तर मराठी में लिखने की अनुमति दी जाए, बल्कि प्रश्नपत्र भी मराठी भाषा में दिया जाए। छात्र का तर्क था कि इससे उसकी समझ और प्रदर्शन बेहतर हो सकेगा।

हाईकोर्ट की पीठ का स्पष्ट रुख

इस मामले की सुनवाई Vibha Kankanwadi और Hiten S. Venegavkar की खंडपीठ ने की। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि छात्र को परीक्षा में उत्तर मराठी भाषा में लिखने की पूरी स्वतंत्रता होगी, लेकिन प्रश्नपत्र अंग्रेज़ी में ही रहेगा।

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में एकरूपता बनाए रखना ज़रूरी है और प्रश्नपत्र की भाषा बदलने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किए जा सकते।

भाषा अधिकार और परीक्षा व्यवस्था में संतुलन

हाईकोर्ट ने माना कि छात्र की भाषाई पृष्ठभूमि का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी ज़रूरी है कि परीक्षा प्रक्रिया में कोई अव्यवस्था न हो। अदालत के अनुसार, उत्तर मराठी में लिखने की अनुमति देकर छात्र के अधिकारों की रक्षा हो जाती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने और संस्थागत ढांचे को बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित करता है।

भविष्य में क्या असर पड़ेगा

यह निर्णय भविष्य में उन छात्रों के लिए मिसाल बन सकता है, जो अपनी मातृभाषा में उत्तर लिखने की अनुमति चाहते हैं। हालांकि, यह भी साफ हो गया है कि प्रश्नपत्र की भाषा को लेकर अदालतें बेहद सतर्क रुख अपनाएंगी।

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