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अखिलेश यादव के सवाल पर अनिरुद्धाचार्य का पलटवार भगवान के नाम अनंत हैं पर कुछ लोग सिर्फ याद किया हुआ जवाब ही मानते हैं

सड़क किनारे हुई बहस के वायरल वीडियो पर अनिरुद्धाचार्य ने प्रवचन में दिया जवाब, बोले- “मैंने सच कहा, पर नेता को उसका ‘तैयार जवाब’ चाहिए था

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अखिलेश यादव के सवाल पर अनिरुद्धाचार्य का पलटवार, बोले: "भगवान के नाम अनंत हैं"
वायरल वीडियो में बातचीत करते हुए अखिलेश यादव और अनिरुद्धाचार्य महाराज की सड़क किनारे की मुलाकात।

उत्तर प्रदेश की राजनीति और धर्म के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति देखने को मिली, जब एक वायरल वीडियो में अखिलेश यादव और धर्मगुरु अनिरुद्धाचार्य महाराज के बीच भगवान श्रीकृष्ण के ‘पहले नाम’ को लेकर दिलचस्प और विचारोत्तेजक संवाद देखा गया। यह वीडियो किसी हाईवे पर रिकॉर्ड किया गया था, जहां समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री की धर्मगुरु से मुलाकात हुई।

इस बातचीत के दौरान सपा प्रमुख ने अनिरुद्धाचार्य से सवाल किया, “कन्हैया का पहला नाम क्या है?” इस सवाल का कोई स्पष्ट उत्तर न मिलने पर अखिलेश ने कहा, “तो फिर आपके और हमारे रास्ते अलग हैं।” इस संवाद पर अब खुद अनिरुद्धाचार्य महाराज ने प्रवचन के दौरान खुलकर अपनी बात रखी है और सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही बहस को नई दिशा दे दी है।

सवाल पूछने वाला जवाब पहले से तय कर आता है अनिरुद्धाचार्य

धर्मगुरु ने अपने प्रवचन में कहा, “सवाल करने वाला अक्सर अपना जवाब पहले से याद कर आता है और वही सही मानता है। भगवान के तो अनंत नाम हैं – श्रीकृष्ण, गोपाल, माधव, वासुदेव, कन्हैया – कौन कहे कि कौन-सा पहला था?”

अनिरुद्धाचार्य का यह बयान एक तरह से सीधा संकेत था कि वे किसी धार्मिक तथ्य को एक निश्चित शब्द में बांधने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों के लिए घरों में सबसे पहले ‘लाला’ या ‘लाली’ जैसे शब्द बोले जाते हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “कोई भी बालक हो, सबसे पहले लोग यही पूछते हैं – लाला है या लाली? ऐसे ही कन्हैया का पहला नाम भी ‘लाला’ ही तो हुआ ना।

अखिलेश यादव ने उठाया वर्ण व्यवस्था और शूद्र पर सवाल

अखिलेश यादव की यह बहस केवल भगवान के नाम तक सीमित नहीं थी। उन्होंने जाति व्यवस्था, वर्ण व्यवस्था और ‘शूद्र’ शब्द को लेकर भी गंभीर सवाल धर्मगुरु के सामने रखे। वीडियो में देखा जा सकता है कि सपा अध्यक्ष सामाजिक न्याय की भाषा में अनिरुद्धाचार्य से कुछ गंभीर विषयों पर बात कर रहे हैं।

लेकिन अनिरुद्धाचार्य ने इन विषयों पर सीधे जवाब देने के बजाय यह कहा कि “नेता लोग जब जवाब उनके मन के अनुसार नहीं मिलता, तो रास्ते अलग कर लेते हैं।”

अगर आप लिखी बात ही मानेंगे तो कोई तर्क नहीं जीतेगा

अनिरुद्धाचार्य ने अपने जवाब में यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति सिर्फ वही बात सही मानता है जो लिखी हुई हो, तो तर्क और विवेक की कोई जगह नहीं बचती। उन्होंने व्यंग्य में कहा, “अगर आप सिर्फ लिखे हुए को मानें और बाकी को झुठलाएं, तो आपसे कोई नहीं जीत सकता।”

इस बयान से स्पष्ट है कि धर्मगुरु शास्त्रों और अनुभवजन्य ज्ञान दोनों को समान रूप से मानते हैं, और केवल लिपिबद्ध उत्तरों पर टिके रहना उन्हें स्वीकार नहीं।

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ी चर्चा

यह वीडियो, जिसमें अखिलेश यादव और अनिरुद्धाचार्य महाराज के बीच खुला संवाद दिख रहा है, सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में शेयर किया गया है। इस बातचीत को लेकर लोगों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं—कुछ इसे “ज्ञान की टक्कर” बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक स्टंट मान रहे हैं।

जहां एक ओर अखिलेश यादव राजनीति और धर्म के बीच की दूरी दिखाना चाह रहे थे, वहीं अनिरुद्धाचार्य अपने अनुभव और विवेक से जवाब देने की कोशिश कर रहे थे।

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