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हर साल वर्ल्ड कप ओवरकिल है: Ashwin ने ICC को दी FIFA मॉडल अपनाने की सलाह
आर अश्विन बोले—चार साल में एक ODI वर्ल्ड कप ही बनाएगा इस फॉर्मेट को खास, नहीं तो खत्म होने की ओर है वनडे
क्रिकेट कैलेंडर में बढ़ती भीड़ और हर साल किसी-न-किसी बड़े टूर्नामेंट पर दिग्गज ऑफ स्पिनर Ravichandran Ashwin ने खुलकर सवाल उठाए हैं। अपने यूट्यूब चैनल Ash Ki Baat पर अश्विन ने कहा कि लगातार वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे आयोजनों ने इन टूर्नामेंट्स की खासियत और वैल्यू को कम कर दिया है।
अश्विन का मानना है कि International Cricket Council को शेड्यूलिंग पर दोबारा विचार करना चाहिए। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि FIFA अपने वर्ल्ड कप को चार साल में एक बार आयोजित करता है, जिससे उसका क्रेज बरकरार रहता है। “फुटबॉल में सालभर लीग्स चलती हैं, लेकिन वर्ल्ड कप चार साल में आता है, इसलिए वह एक असली मेगा इवेंट बनता है,” अश्विन ने कहा।
उन्होंने मौजूदा क्रिकेट परिदृश्य को “ओवरकिल” बताते हुए कहा कि बहुत ज्यादा फॉर्मेट, बहुत ज्यादा द्विपक्षीय सीरीज और हर साल कोई-न-कोई वर्ल्ड कप—ये सब मिलकर खासकर ODI क्रिकेट को नुकसान पहुंचा रहे हैं। 2025 में पुरुषों की चैंपियंस ट्रॉफी और महिलाओं का ODI वर्ल्ड कप हुआ, जबकि 2026 में पुरुष और महिला—दोनों के T20 वर्ल्ड कप प्रस्तावित हैं।

अश्विन ने वनडे को बचाने का एक सीधा रास्ता भी सुझाया। उनके मुताबिक, अगर सच में ODI को प्रासंगिक बनाना है तो चार साल में सिर्फ एक 50 ओवर का वर्ल्ड कप होना चाहिए। इससे फैंस में इंतजार और उत्साह दोनों बने रहेंगे। “वरना मुझे लगता है कि वनडे क्रिकेट एक धीमी मौत की तरफ बढ़ रहा है,” उन्होंने दो टूक कहा।
जहां Sachin Tendulkar जैसे दिग्गज वनडे को नया रूप देने के लिए स्प्लिट-इनिंग्स जैसे प्रयोगों की बात कर चुके हैं, वहीं अश्विन का नजरिया अलग है—वे ढांचे में बदलाव के बजाय कैलेंडर की सादगी पर जोर देते हैं।
अश्विन ने यह भी कहा कि जब Virat Kohli और Rohit Sharma जैसे बड़े नाम वनडे से दूर होंगे, तब यह फॉर्मेट और संघर्ष करेगा। उन्होंने Mahendra Singh Dhoni का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले वनडे में धैर्य, सिंगल्स और अंत में आक्रमण—सबका संतुलन होता था। “आज दो नई गेंदें और पावरप्ले नियमों के कारण या तो रन-फ्लड आता है या विकेट गिरते ही ढहाव,” अश्विन ने आधुनिक वनडे को बैशाथॉन या कोलैप्स बताया।
कुल मिलाकर, अश्विन की बातों ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या ODI क्रिकेट को बचाने के लिए ICC को FIFA की तरह कम लेकिन खास मॉडल अपनाना चाहिए।
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