NEW YEAR
रायपुर मॉल से नए साल का पोस्टकार्ड तोड़फोड़ के बाद भी नहीं टूटी रौनक
क्रिसमस सजावट की तोड़फोड़ के एक हफ्ते बाद मैग्नेटो मॉल ने फिर सजाया ‘विंटर वंडरलैंड’ शहर ने एकजुट होकर हिंसा को नकारा
नए साल की पूर्व संध्या पर Magneto Mall की चमक-दमक देखकर कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता कि ठीक एक हफ्ता पहले यही जगह हिंसा और तोड़फोड़ की खबरों में थी। बुधवार को जैसे ही परिवार, बच्चे और युवा मॉल में दाख़िल हुए, वहां का माहौल साफ़ संदेश दे रहा था—डर के आगे जश्न जीता है।
पिछले हफ्ते रायपुर में एक भीड़ ने क्रिसमस की सजावट को नुकसान पहुंचाया था। आरोप Bajrang Dal से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं पर लगे। घटना के बाद मॉल प्रबंधन ने चुपचाप, लेकिन मज़बूती के साथ दोबारा सजावट की। लाल-हरे रंगों में सजी 35 फ़ुट ऊंची ‘ग्रैंड बेल’, सितारे, सुनहरी घंटियां और खिलौना घोड़े—सब कुछ पहले से ज्यादा सलीके और रोशनी के साथ लौट आया।
मॉल में आए लोगों की प्रतिक्रियाएं एक जैसी थीं—हिंसा का विरोध और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की अपील। रायपुर के निवासी मनोज कहते हैं, “मैं हिंदू हूं, लेकिन हिंसा की निंदा करता हूं। विरोध अपनी जगह है, पर तोड़फोड़ गलत है। यह देखकर अच्छा लगा कि मॉल ने डर के आगे घुटने नहीं टेके।” उनके साथ आए बेटे की बात मनोज को खास लगी—“सबको खुश रहने का हक़ है।”
सोशल मीडिया पर भी यही भाव दिखा। मॉल प्रबंधन की इंस्टाग्राम रील—जिसमें तोड़फोड़ और फिर नई सजावट के दृश्य साथ दिखाए गए—तेजी से वायरल हुई। हज़ारों लाइक्स और कमेंट्स में लोगों ने मॉल का समर्थन किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

भिलाई से आए राजा ख़ान अपनी पत्नी रानी और बच्चों के साथ सजावट देख खुश नज़र आए। रानी कहती हैं, “तोड़फोड़ गलत थी। अच्छा लगा कि सजावट फिर से हुई और पहले से बेहतर दिख रही है।” 17 वर्षीय छात्रा सुमन पटेल के लिए भी यह जगह शहर की पहचान है—“रील देखकर दुख हुआ था, अब देखकर खुशी हो रही है कि रायपुर ने हार नहीं मानी।”
कानूनी मोर्चे पर, मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों को सत्र अदालत से ज़मानत मिल चुकी है। मॉल प्रबंधन ने मीडिया से ज़्यादा कुछ कहने से परहेज़ किया, लेकिन उनकी रील का संदेश साफ़ था—“हम टूटे नहीं, हम फिर तैयार हैं—शहर को खुश करने के लिए।”
यह सिर्फ़ एक मॉल की कहानी नहीं, बल्कि Raipur की सामूहिक आवाज़ है—जहां अलग-अलग आस्थाओं और पृष्ठभूमियों के लोग साथ आए, और नए साल में हिंसा के बजाय उम्मीद को चुना।
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