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Snicko पर फिर उठा सवाल: एशेज टेस्ट में जेमी स्मिथ बने दो बड़े फैसलों का केंद्र

एडिलेड टेस्ट के दूसरे दिन Snicko तकनीक ने खड़ा किया नया विवाद, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी दिखे नाराज़

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Jamie Smith Snicko Controversy: Ashes Test Day 2 Sparks Debate on Technology
एडिलेड टेस्ट के दूसरे दिन Snicko फैसले के बाद मैदान छोड़ते इंग्लैंड के बल्लेबाज़ जेमी स्मिथ

क्रिकेट में तकनीक को गलत फैसलों को कम करने के लिए लाया गया था, लेकिन एशेज सीरीज़ के तीसरे टेस्ट में एक बार फिर यह बहस तेज हो गई कि क्या तकनीक हमेशा भरोसेमंद है। एडिलेड ओवल में खेले जा रहे ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड टेस्ट के दूसरे दिन Snicko तकनीक दो अहम मौकों पर चर्चा का विषय बन गई।

इन दोनों विवादित फैसलों के केंद्र में रहे इंग्लैंड के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ जेमी स्मिथ। पहला मामला ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस के ओवर में सामने आया। एक उछाल लेती गेंद स्मिथ के हेलमेट पर लगी, लेकिन उस समय उनके हाथ ऊपर थे, जिससे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को लगा कि गेंद पहले दस्ताने से टकराई है। स्लिप में खड़े उस्मान ख्वाजा ने कैच पकड़ लिया और ज़ोरदार अपील हुई।

मैदान पर मौजूद अंपायर नितिन मेनन कैच की साफ़ स्थिति को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। दिलचस्प बात यह रही कि ऑस्ट्रेलिया ने रिव्यू नहीं लिया, लेकिन इसके बावजूद अंपायर ने थर्ड अंपायर की मदद लेने का फैसला किया।

रीप्ले में साफ दिखा कि गेंद जब दस्तानों के पास से गुज़री, तब Snicko पर कोई स्पाइक नहीं था, लेकिन जैसे ही गेंद हेलमेट से टकराई, Snicko पर बड़ा स्पाइक दिखाई दिया। इसके बाद थर्ड अंपायर क्रिस गैफनी ने जेमी स्मिथ को नॉट आउट करार दिया।

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इस फैसले से ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी खासे नाराज़ नज़र आए। तेज़ गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क को स्टंप माइक पर यह कहते हुए सुना गया कि “Snicko को ही हटा देना चाहिए।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

दिन के खेल में जेमी स्मिथ से जुड़ा एक और Snicko फैसला भी सामने आया, जिसने तकनीक की विश्वसनीयता पर सवाल और गहरा कर दिया। दर्शकों और विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि क्या हर बार Snicko के ग्राफ को ही अंतिम सच मान लेना चाहिए।

गौरतलब है कि Decision Review System (DRS) को साल 2008 में क्रिकेट में इस उद्देश्य से लाया गया था कि ‘हाउलर’ फैसलों को रोका जा सके। लेकिन एडिलेड टेस्ट के ये दोनों वाकये दिखाते हैं कि तकनीक के बावजूद क्रिकेट में विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

एशेज जैसी प्रतिष्ठित सीरीज़ में ऐसे फैसले न सिर्फ मैच का रुख बदल सकते हैं, बल्कि भविष्य में अंपायरिंग और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी नई बहस छेड़ देते हैं।

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