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Environment

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर सख्त फैसला, दफ्तरों में 50 प्रतिशत स्टाफ ही आएगा ऑफिस

GRAP स्टेज-III लागू, सरकारी और निजी दोनों कार्यालयों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य, नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई

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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच सरकार ने दफ्तरों के लिए 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम का आदेश जारी किया
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच सरकार ने दफ्तरों के लिए 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम का आदेश जारी किया

दिल्ली की हवा एक बार फिर लोगों की सांसों पर भारी पड़ने लगी है। बढ़ते एयर पॉल्यूशन और लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। राजधानी के सभी सरकारी और निजी दफ्तरों को अब केवल 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ ही कार्यालय खोलने की अनुमति दी गई है, जबकि बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करना अनिवार्य होगा।

यह फैसला ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-III के तहत लिया गया है, जिसे खास तौर पर सर्दियों के मौसम में बढ़ने वाले प्रदूषण को काबू में रखने के लिए लागू किया जाता है।

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क्यों लिया गया यह फैसला?

दिल्ली में नवंबर-दिसंबर के आते ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच जाता है। गाड़ियों का धुआं, निर्माण कार्य, पराली की समस्या और मौसम की मार—ये सभी कारण मिलकर हवा को ज़हर बना देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दफ्तरों में रोजाना आने-जाने वाले लाखों कर्मचारियों की वजह से सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे प्रदूषण और गंभीर हो जाता है।

सरकार का यह कदम वाहनों की आवाजाही कम करने, ईंधन की खपत घटाने और PM2.5 व PM10 जैसे हानिकारक कणों को नियंत्रित करने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।

किन सेवाओं को मिली छूट?

हालांकि यह नियम सभी पर लागू नहीं होगा। सरकार ने साफ किया है कि आवश्यक सेवाएं इस आदेश से बाहर रहेंगी। इनमें शामिल हैं:

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच सरकार ने दफ्तरों के लिए 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम का आदेश जारी किया
  • अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं
  • फायर ब्रिगेड
  • पानी और बिजली की आपूर्ति से जुड़े विभाग
  • स्वच्छता सेवाएं
  • सार्वजनिक परिवहन

इन सेवाओं को सामान्य रूप से काम करने की अनुमति दी गई है ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

निजी कंपनियों पर भी सख्ती

दिल्ली सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आदेश सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं है। निजी कंपनियों और कॉरपोरेट ऑफिसों को भी इन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित जांच करें और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं।

अगर कोई संस्था इन आदेशों की अनदेखी करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

कर्मचारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

जहां कई कर्मचारियों ने इस फैसले को सेहत के लिहाज से सही बताया है, वहीं कुछ लोगों को अचानक वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू होने से दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। आईटी सेक्टर में काम करने वाले एक कर्मचारी का कहना है,
“कम से कम प्रदूषण के दिनों में यह फैसला हमारी सेहत के लिए जरूरी है, भले ही कामकाज में थोड़ी असुविधा हो।”

आगे क्या?

सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो GRAP के अगले चरण भी लागू किए जा सकते हैं, जिसमें स्कूलों की छुट्टियां, निर्माण कार्य पर रोक और अन्य कड़े कदम शामिल हो सकते हैं।

फिलहाल, दिल्लीवासियों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें और सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी से पालन करें।

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