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रूस की ‘Golden Girl’ से भारत के ‘James Bond’ तक… Alina Kabaeva की रहस्यमयी दुनिया और Ajit Doval का अधूरा मिशन
जहां Kremlin की गलियों में Alina Kabaeva का प्रभाव है, वहीं 2005 में Ajit Doval Dawood Ibrahim को खत्म करने के बेहद करीब पहुंच गए थे—लेकिन एक गलती ने इतिहास बदल दिया
दुनिया की राजनीति और खुफिया अभियानों की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो सीधे सुर्खियों में कम, लेकिन परछाइयों में ज़्यादा ताकत रखते हैं। रूस में ऐसी ही एक शख्सियत हैं Alina Kabaeva और भारत में वही छाया-युद्ध लड़ने वाला नाम है Ajit Doval।
एक ओर Kremlin की सत्ता के गलियारों में 42 वर्षीय पूर्व Rhythmic Gymnast Alina Kabaeva को Vladimir Putin की “Golden Girl” कहा जाता है, वहीं दूसरी ओर भारत में Ajit Doval को लंबे समय से देश का “James Bond” माना जाता रहा है।
Alina Kabaeva: सत्ता की छाया में एक रहस्यमयी चेहरा
रूसी राजनीति में Alina Kabaeva सिर्फ एक पूर्व खिलाड़ी नहीं हैं। ओलंपिक गोल्ड जीत चुकी Kabaeva बाद में राजनीति और मीडिया की दुनिया में पहुंचीं।
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह लंबे समय से Putin के बेहद करीबी मानी जाती रही हैं। उनकी सार्वजनिक मौजूदगी सीमित है, लेकिन प्रभाव बेहद गहरा बताया जाता है।

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Kremlin के भीतर उनकी भूमिका को लेकर आधिकारिक पुष्टि भले न हो, लेकिन वर्षों से चल रही फुसफुसाहटें बताती हैं कि वह रूस की सत्ता संरचना में एक “quiet influence” रखती हैं।
भारत का James Bond: जब Ajit Doval Dawood Ibrahim को खत्म करने के करीब थे
उधर भारत में हाल ही में Ranveer Singh स्टारर फिल्म Dhurandhar ने भारतीय जासूसों की बहादुरी को फिर से चर्चा में ला दिया। इसी बहाने एक पुरानी, लेकिन बेहद चौंकाने वाली कहानी फिर सामने आई—जब Ajit Doval अंडरवर्ल्ड डॉन Dawood Ibrahim को खत्म करने से बस एक कदम दूर थे।
यह साल था 2005। Ajit Doval जनवरी में Intelligence Bureau के डायरेक्टर पद से रिटायर हो चुके थे, लेकिन एक बेहद संवेदनशील ऑपरेशन की कमान उन्हीं के हाथों में थी।
Dubai में Dawood को मारने की साजिश
खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली कि Dawood Dubai में अपनी बेटी Mahrukh की शादी में शामिल होने वाला है। दूल्हा था Junaid Miandad, जो पाकिस्तानी क्रिकेटर Javed Miandad का बेटा है।
इस मौके को Dawood को खत्म करने का सुनहरा अवसर माना गया।
ऑपरेशन के लिए Dawood के पुराने दुश्मन Chhota Rajan से संपर्क किया गया। Rajan ने अपने दो भरोसेमंद लोगों—Vicky Malhotra और Farid Tanasha—को चुना।

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पूरे मिशन की रणनीति Ajit Doval खुद लीड कर रहे थे।
एक चूक और ऑपरेशन का अंत
यहीं कहानी ने खतरनाक मोड़ लिया।
Mumbai Police पहले से ही Vicky Malhotra और Farid Tanasha की गतिविधियों पर नज़र रखे हुए थी। जैसे ही उन्हें दिल्ली में इनकी मौजूदगी की सूचना मिली, Deputy Commissioner of Police Dhananjay Kamlakar के निर्देश पर टीम भेज दी गई।
जिस होटल में Ajit Doval दोनों को ब्रीफ कर रहे थे, वहीं अचानक छापा पड़ गया।
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही पूरा मिशन रद्द करना पड़ा।
‘कोऑर्डिनेशन की कमी थी, साजिश नहीं’
इस पूरे घटनाक्रम पर बाद में पूर्व Indian Police Service अधिकारी Meera Borwankar ने अपनी किताब Madam Commissioner में विस्तार से लिखा।
उन्होंने साफ कहा कि यह “एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी” थी, न कि Mumbai Police की किसी तरह की Dawood से मिलीभगत।
Borwankar के मुताबिक, उस समय Project X नाम से अंडरवर्ल्ड एक्सटॉर्शन कॉल्स को ट्रैक किया जा रहा था, और उसी दौरान यह टकराव हुआ।
निष्कर्ष: इतिहास के दो छोर, एक जैसी छाया
Alina Kabaeva और Ajit Doval—दोनों अलग देशों, अलग सिस्टम और अलग दुनिया से हैं, लेकिन दोनों की कहानियों में एक समानता है।
दोनों खुले मंच पर कम, लेकिन पर्दे के पीछे सत्ता और सुरक्षा के सबसे बड़े खेल का हिस्सा रहे हैं।
जहां रूस में Kabaeva को आज भी रहस्य की तरह देखा जाता है, वहीं भारत में Ajit Doval का अधूरा Dawood ऑपरेशन आज भी सबसे साहसिक—but failed—covert missions में गिना जाता है।
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