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Ravi Shastri का बड़ा बयान… “अगर मैं कोच होता तो जिम्मेदारी मेरी भी होती”, Gautam Gambhir पर पहली बार खुलकर बोले
भारत की लगातार टेस्ट हार पर रवि शास्त्री ने साधा निशाना—कहा, खिलाड़ियों और कोच दोनों को लेनी होगी जिम्मेदारी, BCCI ने भी बुलाई अहम बैठक
भारतीय टेस्ट टीम की लगातार निराशाजनक प्रदर्शन ने आखिरकार क्रिकेट दिग्गजों को भी बोलने पर मजबूर कर दिया है। टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने इस बार मौजूदा कोच गौतम गंभीर को खुलकर बचाने से इनकार कर दिया है।
उन्होंने साफ कह दिया—“अगर यह सब मेरे दौर में हुआ होता, तो सबसे पहले जिम्मेदारी मैं लेता। लेकिन खिलाड़ियों को भी बख्शता नहीं।”
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने गंभीर के कोच बनने के बाद अब तक खेले गए 5 टेस्ट सीरीज में सिर्फ एक ही जीती है—वह भी वेस्टइंडीज जैसी कमजोर टीम के खिलाफ।
ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीम को हार झेलनी पड़ी, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज ड्रॉ पर खत्म हुई।
“यह टीम इतनी खराब नहीं है” – शास्त्री की गंभीर टिप्पणी
गुवाहाटी टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत ने जिस तरह पहले 100/1 से 130/7 का स्कोर बनाया, उसने शास्त्री को चौंका दिया।
उन्होंने कहा:
“यह टीम इतनी भी बुरी नहीं कि स्पिन सामने ऐसे ढह जाए। ये वही खिलाड़ी हैं जो बचपन से स्पिन खेलते आए हैं।”
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उनकी बात में दम है। जिस टीम में रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बल्लेबाज रहे हैं, वहां स्पिन के खिलाफ इतना संघर्ष असामान्य है।
क्या शास्त्री गंभीर को बचा रहे थे?—उन्होंने खुद जवाब दिया
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह हेड कोच गंभीर को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्होंने साफ कहा:
“मैं किसी को नहीं बचा रहा। 100% जिम्मेदारी उनकी भी है।
अगर मैं कोच होता तो पहली जिम्मेदारी मेरी होती, लेकिन टीम मीटिंग में खिलाड़ियों को छोड़ता नहीं।”
यह बयान इस बात का संकेत है कि शास्त्री गंभीर की आलोचना से पीछे नहीं हट रहे, लेकिन साथ ही वे खिलाड़ियों को भी कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
BCCI ने बुलाई बड़ी बैठक—क्या गंभीर की कुर्सी खतरे में?
मामला अब गंभीर (Gambhir) से कहीं ज्यादा गंभीर हो चुका है।
रिपोर्ट के मुताबिक, BCCI ने एक बड़ी बैठक बुलाई है जिसमें—

- हेड कोच गौतम गंभीर
- चयन समिति प्रमुख अजीत आगरकर
- और बोर्ड के शीर्ष अधिकारी
शामिल होंगे।
हालांकि अभी गंभीर की नौकरी सुरक्षित मानी जा रही है, लेकिन बोर्ड इस बात को स्वीकार कर चुका है कि टीम में कुछ न कुछ सही नहीं चल रहा है।
गंभीर पर दवाब क्यों बढ़ रहा है?
- टीम लगातार तीन बड़ी विदेशी टीमों के खिलाफ हारी है
- घरेलू पिचों पर भी बल्लेबाजी ढह रही है
- युवा खिलाड़ियों का चयन और फॉर्म दोनों चिंताजनक हैं
- टीम में सामंजस्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं
इससे पहले 2021 में विराट कोहली–BCCI कप्तानी विवाद, और
2006 में ग्रेग चैपल–सौरव गांगुली विवाद भी टीम को भारी नुकसान पहुंचा चुके हैं।
शास्त्री का संदेश: ‘टीम इंडिया को जागने की जरूरत है’
शास्त्री ने जो कहा, वह सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि एक तगड़ा मैसेज है—
“यह टीम टैलेंटेड है, मजबूत है, लेकिन जिम्मेदारी उठानी होगी—कोच और खिलाड़ी दोनों को।”
मौजूदा स्थिति देखकर लग रहा है कि टेस्ट क्रिकेट में भारत को नया संतुलन और नई सोच की जरूरत है।
और इस बदलाव की शुरुआत शायद इसी BCCI मीटिंग से हो सकती है।
