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12 राज्यों में SIR अपडेट की समय-सीमा 7 दिन बढ़ी… वोटर लिस्ट सुधारने का बड़ा फैसला
चुनाव आयोग ने कहा— अंतिम मतदाता सूची को और सटीक बनाने के लिए जरूरी था यह विस्तार
देश में चुनावी तैयारियों को और मजबूत करने के लिए चुनाव आयोग ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया की समय-सीमा एक हफ्ते के लिए बढ़ा दी है। आयोग का कहना है कि इस फैसले से मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, गलतियां सुधारने और हटाने जैसी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और अंतिम सूची ज्यादा सटीक बनेगी।
नई टाइमलाइन जारी करते हुए आयोग ने कहा कि अब SIR की अंतिम तारीख 11 दिसंबर 2025 कर दी गई है। इसके बाद ड्राफ्ट रोल, आपत्तियां और अंतिम प्रकाशन से जुड़ी सभी गतिविधियाँ नई तिथियों के हिसाब से पूरी होंगी।
स्थानीय चुनाव अधिकारियों के अनुसार, कई राज्यों में अभी भी घर-घर सत्यापन (Enumeration) का काम तेज़ी से चल रहा है। शहरों की नई कॉलोनियों, ग्रामीण इलाकों में बदले हुए मतदान केंद्रों और कुछ जगहों पर बूथों के पुनर्गठन की वजह से कई क्षेत्र समय पर कार्य पूरा नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में 7 दिन की मियाद बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया था।
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कौन-कौन से राज्य शामिल हैं?
इस विस्तार का लाभ उन सभी राज्यों को मिलेगा जहां SIR पहले से चल रही थी। इनमें शामिल हैं—
अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।
राज्यों के चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इस विस्तार से BLO और ERO स्तर पर फील्ड वेरिफिकेशन और सुनवाई को भी अतिरिक्त समय मिल जाएगा।

अब SIR का नया शेड्यूल
एन्यूमरेशन पीरियड (घर-घर सत्यापन)
11 दिसंबर 2025 (गुरुवार) तक
मतदान केंद्रों का पुनर्गठन/पुनर्व्यवस्था
11 दिसंबर 2025 (गुरुवार) तक
कंट्रोल टेबल अपडेट करना और ड्राफ्ट रोल तैयार करना
12 दिसंबर 2025 (शुक्रवार) से 15 दिसंबर 2025 (सोमवार)
ड्राफ्ट इलेक्ट्रोरल रोल का प्रकाशन
16 दिसंबर 2025 (मंगलवार)
दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि
16 दिसंबर 2025 (मंगलवार) से 15 जनवरी 2026 (गुरुवार)
नोटिस फेज (सुनवाई/सत्यापन/निर्णय)
16 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 (शनिवार)
इस दौरान ERO सभी दावे–आपत्तियों का निपटारा करेंगे।
फाइनल परमिशन और हेल्थ पैरामीटर चेकिंग
10 फरवरी 2026 तक
अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
14 फरवरी 2026 (शनिवार)
इसका मतलब क्या है?
- नए वोटर अपना नाम जुड़वा सकेंगे और गलतियाँ सुधारने वालों को ज्यादा समय मिलेगा।
- BLO और ERO को फील्ड वेरिफिकेशन और सुनवाई के लिए अतिरिक्त समय मिला है।
- आयोग का उद्देश्य है कि अंतिम मतदाता सूची सटीक, अपडेटेड और त्रुटिरहित तैयार की जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला खासकर उन राज्यों के लिए राहत लेकर आया है जहां ग्रामीण इलाकों में डेटा अपडेट धीमा चल रहा था। नई हाउसिंग सोसायटियों, शहरी विस्तार और बूथ रीअलाइनमेंट ने काम का बोझ बढ़ा दिया था।
कोलकाता के चुनाव विशेषज्ञ डॉक्टर अनिरुद्ध सेन की मानें तो, “एक हफ्ते का यह विस्तार उन लाखों नए वोटरों के लिए बेहद जरूरी था जो पहली बार नाम जुड़वाना चाहते हैं। इससे 2026 के शुरुआती चुनावों में साफ-सुथरी मतदाता सूची मिल सकेगी।”
12 राज्यों में SIR प्रक्रिया का संभावित प्रभाव (Dainik Diary Analysis)
| Parameter | Expected Impact (2025–2026) | Dainik Diary Analysis |
|---|---|---|
| नए वोटरों के नाम जुड़ने की संख्या | 12–18% तक बढ़ोतरी | SIR का समय बढ़ने से युवाओं और नए इलाकों से अधिक आवेदन आएंगे। |
| गलतियों/डुप्लीकेट हटने की दर | 20–25% तक सुधार | ERO–BLO स्तर पर वेरिफिकेशन के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। |
| शहरी क्षेत्रों में वोटर अपडेट | लगभग 15% की वृद्धि | नई कॉलोनियों व अपार्टमेंट्स में सत्यापन पहले धीमा चल रहा था। |
| ग्रामीण क्षेत्रों में नाम हटाना/सुधार | 10–12% तक सुधार | माइग्रेशन और पुरानी एंट्री हटाने में तेजी आएगी। |
| फाइनल इलेक्टोरल रोल की सटीकता | 90–95% तक | आयोग का उद्देश्य एक त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना है। |
| 2026 के शुरुआती चुनावों पर प्रभाव | सकारात्मक | ज्यादा साफ, अपडेटेड और त्रुटिहीन वोटर लिस्ट उपलब्ध होगी। |
