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धर्म पर सवाल उठे तो बोले Shoaib Ibrahim — “मैं फरहान्हा भट्ट का समर्थन धर्म से नहीं, उनके गेम से करता हूं”
‘अब बात धर्म पर आ गई’ — Shoaib Ibrahim ने Farrhana Bhatt को समर्थन देने पर उठे सवालों का शांत लेकिन सटीक जवाब दिया, कहा कि वो खेल की समझ से प्रभावित हैं, न कि किसी धार्मिक जुड़ाव से।
बिग बॉस सीजन 19 (Bigg Boss 19) के घर में हर हफ्ते नए विवाद जन्म ले रहे हैं, लेकिन इस बार चर्चा घर के बाहर की है — और वजह हैं टीवी अभिनेता Shoaib Ibrahim।
हाल ही में अपने सोशल मीडिया Q&A सेशन के दौरान उन्होंने Farrhana Bhatt के गेम की तारीफ की, जिसके बाद कुछ यूज़र्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया।
एक यूज़र ने पूछा — “आप फरहान्हा का समर्थन इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वो मुस्लिम हैं।”
इस पर शोएब ने बिना गुस्सा किए जवाब दिया —
“तो अब बात धर्म पर आ गई? नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। मुझे फरहान्हा का गेम पसंद है; वो पूरे घर में अकेले खड़ी हैं और मज़बूती से खेल रही हैं। इसलिए मैं उनका समर्थन करता हूं।”
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उन्होंने यह भी याद दिलाया कि,
“पिछले साल मैं Karanveer Mehra को सपोर्ट कर रहा था जबकि Vivian Dsena भी शो में थे। तब तो किसी ने धर्म की बात नहीं की थी। इसलिए ये कहना गलत है कि मैं धर्म देखकर किसी का समर्थन करता हूं।”
फरहान्हा भट्ट की तारीफ और दीपिका कक्कड़ की राय
शोएब ने फरहान्हा को “स्ट्रॉन्ग प्लेयर” बताते हुए कहा कि वह कभी-कभी ओवरबोर्ड जाती हैं, परंतु अगर गेम के दृष्टिकोण से देखा जाए तो वह पूरे घर को चला रही हैं।

उनकी पत्नी और बिग बॉस 12 की विजेता Dipika Kakar, जो उसी लाइव सत्र में मौजूद थीं, ने कहा —
“मुझे अच्छा लगा जब Salman Khan सर ने फरहान्हा को सुधारा, और उन्होंने अपने व्यवहार को स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी। यह उनकी विनम्रता दिखाता है।”
शोएब ने आगे कहा कि अगर आप हाल के वीकेंड एपिसोड को देखें तो “फरहान्हा भट्ट और Tanya Mittal को हटाकर किसी के पास कोई चर्चा का विषय नहीं था।”
उन्होंने साथ ही बताया कि उन्हें Baseer Ali और Abhishek Bajaj का गेम भी पसंद था, लेकिन दोनों अब शो से बाहर हो चुके हैं।
धर्म और मनोरंजन का घालमेल क्यों खतरनाक है
आज के डिजिटल युग में जब हर सेलिब्रिटी की बात सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है, किसी भी समर्थन या विरोध को तुरंत धार्मिक रंग दे दिया जाता है।
शोएब के जवाब ने यह साफ कर दिया है कि व्यक्तिगत पसंद का मतलब हमेशा धार्मिक झुकाव नहीं होता।
- ट्रोलिंग की प्रवृत्ति – लोग बिना पूरे संदर्भ को समझे किसी भी टिप्पणी को धर्म या राजनीति से जोड़ देते हैं।
- रियलिटी शो का नया स्वरूप – अब ये शो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद और पब्लिक परसेप्शन का हिस्सा बन चुके हैं।
- फरहान्हा भट्ट जैसी महिलाओं की दृढ़ता – ऐसे शो में जब कोई महिला अकेली लड़ती है, तो उसका समर्थन भी कभी-कभी गलत तरह से लिया जाता है।
निष्कर्ष
Shoaib Ibrahim ने एक बार फिर दिखा दिया कि वे केवल एक परफॉर्मर ही नहीं, बल्कि एक परिपक्व और संतुलित व्यक्ति भी हैं।
उन्होंने साफ कहा कि उनका समर्थन Farrhana Bhatt के गेम और आत्मविश्वास के लिए है, धर्म के लिए नहीं।
ऐसे वक्त में, जब सोशल मीडिया पर धर्म को लेकर हर राय को तोड़ा-मरोड़ा जाता है, शोएब का यह रुख एक सकारात्मक उदाहरण है।
