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अहमदाबाद विमान हादसा: अमेरिकी सरकार के शटडाउन से अटकी 260 मृतकों के परिवारों की न्याय की लड़ाई
12 जून को हुए बोइंग विमान हादसे में मारे गए 260 लोगों के परिवार अब भी न्याय की प्रतीक्षा में, अमेरिकी प्रशासन से जरूरी डेटा न मिलने से मुकदमा अटका।
12 जून को अहमदाबाद से लंदन के गेटविक जा रहे एयर इंडिया फ्लाइट 171 का बोइंग 787-8 विमान टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 241 यात्री और चालक दल के सदस्य, तथा जमीन पर मौजूद 19 लोग, कुल 260 लोगों की मौत हुई। अब, चार महीने बाद भी उनके परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
अमेरिकी सरकार के शटडाउन ने बढ़ाई मुश्किल
अमेरिका में 1 अक्टूबर से शुरू हुए सरकारी शटडाउन ने इस केस से जुड़े कानूनी कदमों को प्रभावित कर दिया है।
अमेरिकी लॉ फर्म बीस्ली एलन (Beasley Allen), जो पीड़ित परिवारों की ओर से मुकदमा दायर करने की तैयारी कर रही है, ने बताया कि फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) से मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारी अब तक नहीं मिली है।
फर्म के प्रमुख वकील माइकल एंड्र्यूज ने बताया,

“सरकारी शटडाउन के कारण एफएए से कोई जवाब नहीं मिला है। हम 125 से अधिक पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन बिना जरूरी डेटा के मुकदमे की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।”
हादसे की भयावह यादें
12 जून की दोपहर, विमान ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में इंजन में ईंधन आपूर्ति बंद हो गई। विमान बेकाबू होकर बी.जे. मेडिकल कॉलेज, मेघानीनगर के लड़कों के हॉस्टल पर जा गिरा। हादसे के वक्त दोपहर का भोजन समय था, जिससे जान-माल की हानि और भी बढ़ गई।
विमान में मौजूद सभी यात्रियों में से सिर्फ एक व्यक्ति – विश्वाश कुमार रमेश, ब्रिटिश नागरिक, जीवित बचे।
पारदर्शिता की मांग
बीस्ली एलन फर्म ने 13 अगस्त को एफएए को सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम (Freedom of Information Act) के तहत आवेदन भेजा था, जिसमें उन्होंने फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) की पूरी रिकॉर्डिंग मांगी थी।
वकील एंड्र्यूज ने कहा कि इन रिकॉर्ड्स से यह स्पष्ट होगा कि हादसे की असली वजह तकनीकी थी या मानव त्रुटि।
“प्रारंभिक रिपोर्ट में कॉकपिट डेटा अधूरा है। इससे पायलटों पर अनावश्यक आरोप लगे हैं, जबकि आधुनिक विमान कंप्यूटर कमांड से भी प्रभावित हो सकते हैं,” एंड्र्यूज ने कहा।
परिवारों का दर्द – “न्याय की राह लंबी है”
दुबई में बसे मुंबई मूल के सैयद इम्तियाज अली, जिनके भाई, भाभी और दो बच्चे इस हादसे में मारे गए, कहते हैं –
“चार परिवारजन खोने का दर्द कभी नहीं मिट सकता, लेकिन हम न्याय के लिए डटे रहेंगे। हमें पता है कि यह प्रक्रिया लंबी चलेगी, लेकिन यह जवाबदेही के लिए जरूरी है।”
एक अन्य पीड़ित परिवार के सदस्य ने कहा,
“हमें पहले ही बताया गया था कि विमान हादसों की जांच और कानूनी प्रक्रिया में एक साल से अधिक लग सकता है। हम मानसिक रूप से तैयार हैं, पर उम्मीद नहीं छोड़ी।”

एयर इंडिया की प्रतिक्रिया
एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने हाल ही में एविएशन इंडिया 2025 सम्मेलन में कहा कि यह हादसा कंपनी के लिए “विनाशकारी और पीड़ादायक” था।
उन्होंने बताया कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की अंतरिम रिपोर्ट में ईंधन कटऑफ की पुष्टि हुई है, लेकिन जांच अब भी जारी है।
“प्रारंभिक निष्कर्षों ने कुछ स्पष्टता दी है, पर अभी बहुत काम बाकी है,” विल्सन ने कहा।
माइकल एंड्र्यूज – पहले भी लड़े हैं ऐसे केस
वकील माइकल एंड्र्यूज का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई विमान हादसों से जुड़ा रहा है।
उन्होंने 2019 में इथियोपियन एयरलाइंस के बोइंग 737 मैक्स क्रैश (302 फ्लाइट) में भी पीड़ित परिवारों की ओर से मुकदमा लड़ा था।
वे दो बार गुजरात आ चुके हैं और खुद मेघानीनगर क्रैश साइट का दौरा कर चुके हैं। उनका कहना है कि पारदर्शिता और सच्चाई सामने लाना ही उनकी प्राथमिकता है।
निष्कर्ष
अहमदाबाद एयरक्रैश सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के लिए आजीवन त्रासदी बन चुका है। अमेरिकी सरकार के शटडाउन ने भले ही मुकदमे की प्रक्रिया धीमी कर दी हो, लेकिन पीड़ितों के परिवार अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि एक दिन सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सज़ा मिलेगी।
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