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वर्ल्ड कप की हीरो अमनजोत कौर को नहीं बताया गया दादी के हार्ट अटैक का सच, जीत के बाद टूटीं भावनाएं
भारत की जीत के पीछे छिपा परिवार का संघर्ष – अमनजोत के परिवार ने छुपाई दादी की गंभीर हालत ताकि बेटी खेल पर ध्यान केंद्रित रख सके
भारत की महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रचते हुए महिला वर्ल्ड कप 2025 का खिताब अपने नाम किया। डॉ. डी.वाई. पाटिल स्टेडियम, नवी मुंबई में खेले गए रोमांचक फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर पहली बार विश्व विजेता का ताज पहना। इस जीत में जहां स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा, हर्मनप्रीत कौर और प्रतिका रावल जैसी स्टार खिलाड़ियों का योगदान रहा, वहीं टीम की ऑलराउंडर अमनजोत कौर की भूमिका भी निर्णायक रही।
फाइनल मुकाबले में अमनजोत ने वह कैच पकड़ा जिसने मैच का रुख पूरी तरह पलट दिया। दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लौरा वूल्वार्ट जब अपने शतक के बाद खतरनाक रूप में नजर आ रही थीं, तभी दीप्ति शर्मा की गेंद पर अमनजोत ने डीप में एक अद्भुत कैच लेकर मैच भारत की झोली में डाल दिया।
लेकिन इस ऐतिहासिक पल के पीछे एक दर्दनाक कहानी छिपी थी — एक ऐसी कहानी जिसे अमनजोत खुद नहीं जानती थीं।

परिवार ने छुपाई दादी के हार्ट अटैक की खबर
मोहाली की रहने वाली अमनजोत कौर जब देश के लिए मैदान में संघर्ष कर रही थीं, तब घर पर उनकी दादी दिल के दौरे से जूझ रही थीं। परिवार ने यह खबर उनसे छुपाई ताकि वह विश्व कप पर अपना ध्यान केंद्रित रख सकें और टीम इंडिया को जीत दिलाने के अपने मिशन से न भटकें।
अमनजोत के पिता भूपिंदर सिंह ने बताया,
“मेरी मां भगवंती जी अमनजोत की सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। जब मैं बलोंगी में अपने बढ़ई के काम पर जाता था, तब वो मोहाली के फेज-5 स्थित पार्क में बैठकर अमनजोत को लड़कों और लड़कियों के साथ खेलते हुए देखा करती थीं। जब उन्हें हार्ट अटैक आया, तो हमने अमनजोत को नहीं बताया, क्योंकि हमें पता था कि वो टूट जाएगी। हमने चाहा कि वो देश के लिए खेल पर फोकस करे। अब जब भारत ने वर्ल्ड कप जीता है, तो ये जीत हमारे लिए जैसे मरहम का काम कर रही है।”
संघर्षों से बनी क्रिकेट स्टार
अमनजोत की कहानी सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है — यह एक मेहनत, संघर्ष और परिवार के विश्वास की कहानी है। मोहाली की गलियों में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने से लेकर विश्व कप के मंच तक पहुंचना आसान नहीं था। दादी की हौसला अफजाई और मां भगवंती का त्याग अमनजोत के सफर की सबसे मजबूत नींव रहे।
वो बचपन से ही क्रिकेट को लेकर जुनूनी थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन मां ने हर हाल में बेटी के सपने को उड़ान दी।
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वर्ल्ड कप फाइनल में ‘टर्निंग पॉइंट’ कैच
भारत की जीत में सबसे अहम मोड़ तब आया जब दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लौरा वूल्वार्ट ने शतक पूरा किया और मैच उनके पक्ष में झुकता दिख रहा था। लेकिन अमनजोत ने डीप में हवा में उछलकर तीन बार गेंद को संभालते हुए आखिरकार कैच पकड़ लिया। पूरा स्टेडियम गूंज उठा और टीम इंडिया ने उस पल से मैच पर पूरी तरह कब्जा कर लिया।
जीत के बाद अमनजोत का भावुक बयान
वर्ल्ड कप जीत के कुछ ही मिनट बाद, जब अमनजोत ने होस्ट ब्रॉडकास्टर से बात की, तो उनकी आंखों में खुशी और भावनाएं दोनों छलक रही थीं। उन्होंने कहा,

“हम सब जानते थे कि वो कैच कितना जरूरी था। मेरे जीवन का सबसे बड़ा पल था वो। पहली बार मुझे दोबारा मौका मिला और मैंने उसे जाने नहीं दिया। शब्द नहीं हैं बताने के लिए कि ये जीत क्या मायने रखती है। हमने इतिहास रचा है और ये तो बस शुरुआत है — अब भारतीय महिला क्रिकेट दुनिया में राज करेगी।”
जब उनसे पूछा गया कि वह अपनी जीत किसे समर्पित करेंगी, तो अमनजोत ने रुकते हुए कहा,
“मेरे परिवार को, मेरे कोचों को… और खासकर मेरी दादी को, जो इस वक्त ठीक नहीं हैं। उम्मीद है वो जल्दी ठीक होंगी और इस जीत को देखकर मुस्कुराएंगी।”
पूरे देश में बधाइयों की बौछार
भारत की इस जीत के बाद देशभर में जश्न का माहौल है। प्रधानमंत्री से लेकर आम जनता तक, सभी ने सोशल मीडिया पर टीम इंडिया को बधाई दी। अमनजोत कौर को पंजाब की ‘लाडो’ कहते हुए लोगों ने गर्व व्यक्त किया।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का महिला वर्ल्ड कप भारतीय महिला क्रिकेट के लिए “टर्निंग पॉइंट” साबित होगा।
भावनाओं से जुड़ी जीत
इस जीत के बाद अमनजोत ने दादी से फोन पर बात की। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने रोते हुए कहा, “मां, अब आप जल्दी ठीक हो जाइए, हमने वो कर दिखाया जो आपने हमेशा सपने में देखा था।”
दादी ने जवाब में सिर्फ इतना कहा — “मुझे पता था, तू जरूर कर दिखाएगी।”
अमनजोत की यह कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की नहीं, बल्कि हर उस बेटी की है जो परिवार की उम्मीदों को अपने कंधों पर लेकर देश का नाम रोशन करती है।

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