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ग्रीटा थनबर्ग का चौंकाने वाला खुलासा – “मुझे पीटा गया, गैस से धमकाया गया और पिंजरों में बंद रखा गया”

स्वीडिश क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रीटा थनबर्ग ने इज़राइली हिरासत में झेले अत्याचारों का किया खुलासा – “अगर मेरे साथ ऐसा हुआ, तो फिलिस्तीनियों के साथ क्या होता होगा”

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ग्रीटा थनबर्ग ने इज़राइली हिरासत में हुए अत्याचारों का किया खुलासा – “मुझे पीटा गया, गैस से धमकाया गया और पिंजरे में रखा गया।”
ग्रीटा थनबर्ग ने इज़राइली हिरासत में हुए अत्याचारों का किया खुलासा – “मुझे पीटा गया, गैस से धमकाया गया और पिंजरे में रखा गया।”

पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रीटा थनबर्ग (Greta Thunberg) ने इज़राइल में अपनी हिरासत के दौरान हुए निर्दय व्यवहार और कथित यातनाओं के दिल दहला देने वाले विवरण साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें पीटा गया, गैस से धमकाया गया, पानी और दवा से वंचित रखा गया, और अपमानित किया गया — वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने गाज़ा के लिए मानवीय सहायता ले जा रहे एक फ्लोटिला में हिस्सा लिया था।

यह खुलासा उन्होंने स्वीडन के अख़बार Aftonbladet को दिए एक साक्षात्कार में किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें पांच दिन तक इज़राइली पुलिस ने हिरासत में रखा और उन पर “मानवता से परे व्यवहार” किया गया।


“हमें पीटा गया, गालियां दी गईं और पिंजरों में बंद किया गया”

ग्रीटा ने बताया कि इज़राइली बलों ने उस फ्लोटिला को जब्त कर लिया जो गाज़ा में राहत सामग्री लेकर जा रहा था।

ग्रीटा थनबर्ग ने इज़राइली हिरासत में हुए अत्याचारों का किया खुलासा – “मुझे पीटा गया, गैस से धमकाया गया और पिंजरे में रखा गया।”

“हमें घसीटकर ले जाया गया, मारा गया, और एक बाड़े वाले इलाके में फेंक दिया गया। मुझे लात मारी गई, मेरी टोपी पर पैर रखा गया, और मुझे झंडे के सामने बैठाकर मजाक उड़ाया गया,” उन्होंने बताया।

ग्रीटा ने कहा कि उनके हाथ प्लास्टिक के टाइट केबल टाईज़ से बांध दिए गए थे, और इसी दौरान गार्ड उनके साथ सेल्फी लेते रहे।

“मैंने देखा कि करीब 50 लोग घुटनों के बल बैठे थे, सिर नीचे और हाथ पीछे बंधे हुए। हर बार जब मैं सिर उठाती, मुझे लात मार दी जाती,” उन्होंने कहा।

“गैस से उड़ाने की धमकी दी गई”

उन्होंने बताया कि करीब 60 कैदियों को एक छोटे खुले पिंजरे में सूरज के नीचे बंद रखा गया था, जहां बैठने की जगह तक नहीं थी।

“जब कुछ लोग बेहोश हो गए और हमने डॉक्टर मांगा, तो गार्ड ने गैस सिलेंडर उठाया और कहा, ‘हम तुम्हें गैस से उड़ा देंगे।’ यह उनके लिए सामान्य था, जैसे मजाक,” ग्रीटा ने बताया।

“मुझे गालियां दी गईं, अलग सेल में डाला गया”

ग्रीटा ने कहा कि उन्हें Lilla hora’ (छोटी वेश्या) और ‘Hora Greta’ (वेश्या ग्रीटा) कहकर अपमानित किया गया।

“उन्होंने मुझे कहा – ‘A special place for a special lady,’ और फिर मुझे एक कोने में धकेल दिया गया। मुझे हर वक्त अपमानजनक नामों से पुकारा गया।”

उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन-गवीर (Itamar Ben-Gvir) ने वहां आकर कैदियों पर चिल्लाया –

“तुम आतंकवादी हो, यहूदी बच्चों को मारना चाहते हो।”
जो कोई जवाब देता, उसे अलग ले जाकर पीटा जाता।

“हमें शौचालय के नल से पानी पीना पड़ा”

ग्रीटा ने बताया कि हिरासत के दौरान साफ पानी और खाना नहीं दिया गया, और उन्हें टॉयलेट सिंक से भूरा पानी पीने को मजबूर किया गया।

“गार्ड हमारे सामने बोतलों से पानी पीते और फिर पूरी बोतल कूड़ेदान में फेंक देते। दवाइयां – दिल, कैंसर और इंसुलिन की – सब कूड़े में डाल दी गईं,” उन्होंने कहा।

कई लोगों की तबीयत बिगड़ी, लेकिन उन्हें डॉक्टर या दवा नहीं दी गई


“अंधेरे कमरे, कीड़े और धमकियां”

उन्होंने बताया कि उन्हें एक अलग सेल में डाला गया, जो “कीड़ों से भरा” था।
उन्हें अंधेरे में नग्न तलाशी दी गई, आंखों पर पट्टी बांधकर और कपड़े उतारकर तलाशी ली गई।

“उन्होंने मुझसे कहा – ‘हमने हमास को तुम्हारे बदले बंधक देने का ऑफर किया।’ फिर बोले, ‘मजाक कर रहे हैं।’ फिर कहा – ‘यह नरसंहार नहीं है। अगर हम करना चाहें, तो कर सकते हैं।’”
ग्रीटा थनबर्ग ने इज़राइली हिरासत में हुए अत्याचारों का किया खुलासा – “मुझे पीटा गया, गैस से धमकाया गया और पिंजरे में रखा गया।”

“अगर मेरे साथ ऐसा हुआ, तो फिलिस्तीनियों के साथ क्या होगा”

ग्रीटा ने कहा कि उनकी पहचान और पासपोर्ट ने उन्हें बचा लिया, लेकिन फिलिस्तीनियों के लिए हालात कहीं ज्यादा भयावह हैं।

“अगर मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया, तो उन लोगों के साथ क्या होता होगा जिनके पास न नागरिकता है, न कैमरे। दीवारों पर हमें खून के धब्बे और फिलिस्तीनी कैदियों के संदेश मिले – वे पहले यहां रह चुके थे,” उन्होंने कहा।

इज़राइल की प्रतिक्रिया

इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को “पूरी तरह झूठा” बताया है। मंत्रालय ने कहा कि फ्लोटिला का उद्देश्य सुरक्षा उल्लंघन था, न कि मानवतावादी मिशन।
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

फ्लोटिला अगस्त के अंत में गाज़ा के लिए रवाना हुई थी — यह इज़राइली नौसैनिक नाकेबंदी को चुनौती देने का नवीनतम प्रयास था।