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Politics

बांग्लादेश की राजनीति की एक युगांतकारी शख्सियत का अंत, Khaleda Zia का 80 वर्ष की उम्र में निधन

ढाका में कल होगा अंतिम संस्कार, भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर होंगे शामिल

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ढाका में समर्थकों को संबोधित करतीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया (फाइल फोटो)

बांग्लादेश की राजनीति में तीन दशकों तक निर्णायक भूमिका निभाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि उनकी पार्टी Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने आधिकारिक बयान जारी कर की।

BNP महासचिव Mirza Fakhrul के अनुसार, खालिदा जिया का अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर 2 बजे ढाका स्थित संसद परिसर के साउथ प्लाजा, Manik Mia Avenue पर किया जाएगा। इस मौके पर भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर अंतिम संस्कार में शामिल होंगे, जो भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से एक अहम कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।

खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और उन्होंने तीन बार देश की बागडोर संभाली—1991 से 1996 तक, 1996 में अल्पकालिक कार्यकाल और फिर 2001 से 2006 तक। उनका राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव, कानूनी लड़ाइयों और सत्ता संघर्ष से भरा रहा। उनकी प्रतिद्वंद्विता मौजूदा प्रधानमंत्री Sheikh Hasina के साथ बांग्लादेश की राजनीति की पहचान बन गई थी।

अपने पहले कार्यकाल के दौरान खालिदा जिया ने संसदीय व्यवस्था को बहाल किया और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े फैसले लिए। मुफ्त प्राथमिक शिक्षा, कक्षा 10 तक छात्राओं के लिए निशुल्क पढ़ाई जैसी योजनाओं ने उन्हें जमीनी स्तर पर लोकप्रिय बनाया। हालांकि, उनका राजनीतिक सफर कई बार गिरफ्तारी, बीमारी और भ्रष्टाचार के मामलों से भी घिरा रहा, जिन्हें वह राजनीतिक साजिश बताती रहीं।

Former Bangladesh PM Khaleda Zia


जनवरी 2025 में Supreme Court of Bangladesh ने उन्हें अंतिम भ्रष्टाचार मामले में बरी कर दिया था, जिसके बाद फरवरी में होने वाले चुनावों में उनकी वापसी की उम्मीद जगी थी। उनके नामांकन पत्र भी एक दिन पहले ही Feni-1 सीट से दाखिल किए गए थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

खालिदा जिया के निधन का समय बेहद संवेदनशील है, क्योंकि बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव प्रस्तावित हैं। हाल के महीनों में देश में राजनीतिक तनाव, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर बहस तेज रही है। इसी बीच उनके बेटे Tarique Rahman की 17 साल बाद बांग्लादेश वापसी ने BNP कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी थी।

खालिदा जिया का जाना सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति के एक पूरे अध्याय का अंत माना जा रहा है। उनके समर्थकों के लिए वह संघर्ष, जिद और नेतृत्व की प्रतीक थीं, जबकि आलोचकों के लिए विवादास्पद लेकिन प्रभावशाली चेहरा।

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