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“परिवार को बीच में मत लाइए” Elon Musk के बर्ताव पर भारतीय मूल के अरबपति की दो टूक

कामकाजी संस्कृति, नेतृत्व और सम्मान पर उठे सवाल, मस्क की कार्यशैली पर खुलकर बोली आलोचना

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एलन मस्क पर कार्यशैली और व्यवहार को लेकर भारतीय मूल के अरबपति की तीखी टिप्पणी
एलन मस्क पर कार्यशैली और व्यवहार को लेकर भारतीय मूल के अरबपति की तीखी टिप्पणी

दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शुमार एलन मस्क एक बार फिर विवादों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई टेक लॉन्च या बिज़नेस डील नहीं, बल्कि उनका कथित बर्ताव है। भारतीय मूल के एक अरबपति निवेशक ने मस्क की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रोफेशनल माहौल में निजी जीवन और परिवार को घसीटना न सिर्फ गलत है, बल्कि यह नेतृत्व की बुनियादी समझ पर भी सवाल खड़े करता है।

उद्योग जगत में लंबे समय से सक्रिय इस अरबपति का कहना है कि किसी भी संगठन की सफलता का आधार सम्मान, स्पष्ट संवाद और पेशेवर सीमाएं होती हैं। अगर किसी लीडर का रवैया अपमानजनक हो जाए, तो उसका असर सिर्फ कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि पूरी कंपनी की संस्कृति पर पड़ता है।

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“लीडरशिप डर से नहीं, भरोसे से चलती है”

आलोचक ने यह भी कहा कि सख्ती और अनुशासन जरूरी हो सकता है, लेकिन गाली-गलौज या व्यक्तिगत हमलों से काम नहीं चलता। एक मजबूत लीडर वह होता है जो टीम को प्रेरित करे, न कि डराए।
उनका मानना है कि टेक इंडस्ट्री में पहले से ही काम का दबाव बहुत ज्यादा है, ऐसे में अगर शीर्ष नेतृत्व संवेदनशीलता न दिखाए, तो टैलेंट का पलायन तय है।

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निजी जीवन को कार्यस्थल से अलग रखने की सलाह

“अगर किसी को काम से नाराज़गी है, तो उसे काम तक ही सीमित रखें,” यही संदेश भारतीय मूल के इस अरबपति ने दिया। उनके मुताबिक, परिवार या निजी रिश्तों को विवादों में लाना न तो नैतिक है और न ही पेशेवर।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया की कई सफल कंपनियां इसलिए आगे बढ़ीं क्योंकि वहां लीडरशिप ने इंसान को पहले और कर्मचारी को बाद में देखा।

क्यों अहम है यह बहस

यह बयान ऐसे समय में आया है जब ग्लोबल कॉर्पोरेट वर्ल्ड में वर्क-लाइफ बैलेंस, मेंटल हेल्थ और सम्मानजनक कार्यसंस्कृति पर खुलकर चर्चा हो रही है। मस्क जैसे प्रभावशाली नाम पर सवाल उठना यह दिखाता है कि अब सिर्फ नतीजे नहीं, बल्कि रास्ते भी मायने रखते हैं।

भारतीय मूल के इस अरबपति की टिप्पणी सिर्फ किसी एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि वह पूरी इंडस्ट्री को यह याद दिलाने की कोशिश है कि ताकत के साथ जिम्मेदारी भी आती है।
नेतृत्व का असली इम्तिहान मुश्किल समय में इंसानियत और संयम बनाए रखने में ही होता है।