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बांग्लादेश में उबाल के बीच बड़ा सियासी मोड़: 17 साल बाद Tarique Rahman की वापसी, भारत में भी गूंजा Dipu Chandra Das का मामला
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंसा और छात्र आंदोलनों के बीच Khaleda Zia के बेटे Tarique Rahman की देश वापसी ने राजनीति को नई दिशा दी, वहीं भारत में विरोध और कूटनीतिक तनाव तेज़
बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। Tarique Rahman की 17 साल बाद देश वापसी और Dipu Chandra Das की कथित लिंचिंग ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। इन घटनाओं का असर न सिर्फ बांग्लादेश की घरेलू राजनीति पर पड़ा है, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में भी तनाव दिखाई देने लगा है।
17 साल बाद Tarique Rahman की वापसी
पूर्व राष्ट्रपति Ziaur Rahman और बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री Khaleda Zia के बेटे Tarique Rahman लंबे समय से स्वैच्छिक निर्वासन में थे। वे 2008 के बाद से देश से बाहर रह रहे थे और हाल के वर्षों में BNP (Bangladesh Nationalist Party) के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे।
Tarique Rahman ने पहले दावा किया था कि तत्कालीन सरकार के दौरान उनके खिलाफ साजिश रची गई और उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश हुई। कई भ्रष्टाचार मामलों में सजा मिलने के कारण उनकी राजनीतिक वापसी लंबे समय तक अटकी रही, लेकिन मौजूदा अस्थिर हालात में उनकी वापसी को एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
Dipu Chandra Das की हत्या और भारत में आक्रोश
बांग्लादेश के Mymensingh में हिंदू समुदाय से जुड़े Dipu Chandra Das की कथित लिंचिंग की खबर सामने आने के बाद भारत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए और सोशल मीडिया पर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे।
भारत में यह मुद्दा सिर्फ एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे मानवाधिकार और धार्मिक सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी बीच बांग्लादेश में छात्र संगठन Inqilab Moncho ने चेतावनी दी है कि अगर उनके संस्थापक Sharif Osman Hadi की हत्या में न्याय नहीं मिला, तो वे देशभर में आंदोलन शुरू करेंगे।

कूटनीतिक तनाव और वीज़ा सेवाओं पर असर
स्थिति के बिगड़ते ही ढाका में भारतीय उच्चायुक्त Pranay Verma को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने तलब किया। उनसे बांग्लादेशी अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इससे पहले Chittagong में भारत के सहायक उच्चायुक्त के आवास पर हमले की खबर आई, जिसके बाद वहां भारतीय वीज़ा सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दी गईं। जवाबी कदम के तौर पर नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग ने भी अस्थायी रूप से वीज़ा और कांसुलर सेवाएं रोक दीं। Tripura में भी बांग्लादेश ने सभी वीज़ा सेवाएं बंद कर दी हैं।
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Tarique Rahman की वापसी BNP को नई ऊर्जा दे सकती है, लेकिन साथ ही यह सत्तारूढ़ ताकतों के लिए चुनौती भी बनेगी। दूसरी ओर, अल्पसंख्यक हिंसा के मामलों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर बांग्लादेश की छवि और कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ेगा।
फिलहाल, बांग्लादेश एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां हर फैसला आने वाले महीनों की राजनीति और क्षेत्रीय स्थिरता को तय कर सकता है।
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