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असम ने खोया अपना स्वर सम्राट जुबीन गर्ग हजारों फैंस की भीड़ में हुआ अंतिम संस्कार
गुवाहाटी से सोणापुर तक फैंस की आंसुओं भरी भीड़, जुबीन गर्ग का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
असम के लोकप्रिय गायक और संगीतकार जुबीन गर्ग अब हमारे बीच नहीं रहे। मंगलवार, 23 सितंबर 2025 को उनका अंतिम संस्कार गुवाहाटी से 30 किलोमीटर दूर सोणापुर के कमरकुची गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
उनके पार्थिव शरीर को फूलों से सजे एंबुलेंस में अरुण भूगेश्वर बरुआ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से अंतिम यात्रा के लिए निकाला गया। इस दौरान एंबुलेंस असमिया गमोसा में ढके, तापमान नियंत्रित ग्लास कॉफिन में रखे शव को लेकर चली। उनके साथ 85 वर्षीय पिता मोहीनी मोहन बोरठाकुर, पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग, परिवार और रिश्तेदार मौजूद रहे।

फैंस की आंसुओं से भीगी विदाई
गुवाहाटी से सोणापुर तक हाईवे के दोनों किनारों पर हजारों फैंस जुटे। कई किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान लोग अपने प्रिय कलाकार की एक झलक पाने के लिए खड़े रहे। सोणापुर पहुंचते ही पूरा माहौल “जॉय जुबीन दा” के नारों से गूंज उठा। फैंस ने उनका लोकप्रिय गीत मायाबिनी गाकर उन्हें विदाई दी।
पारिवारिक और सरकारी मौजूदगी
उनकी बहन पाल्मे बोरठाकुर और शिष्य संगीतकार राहुल गौतम शर्मा ने पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के साथ चिता को अग्नि दी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, किरण रिजिजू और पबित्रा मरघेरिता ने भी श्रद्धांजलि दी और चिता पर लकड़ियां रखीं।
चिता पर उस चंदन के पेड़ की डाली भी रखी गई जिसे जुबीन ने 2017 में अपने जन्मदिन पर लगाया था।
मौत पर उठ रहे सवाल
जुबीन की मौत को लेकर रहस्य बरकरार है। सिंगापुर में हुई पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह डूबना बताई गई थी। लेकिन फैंस की मांग पर गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में दूसरी ऑटोप्सी करवाई गई।

कहा जा रहा है कि बीमार होने के बावजूद उन्हें नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल, सिंगापुर में प्रदर्शन के लिए भावनात्मक दबाव डाला गया। शो रद्द हो गया और इसी बीच उनकी मौत की खबर आई।
राज्यभर में इस घटना को लेकर गुस्सा है। आयोजक श्यामकानु महांता और मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा के खिलाफ 50 से अधिक एफआईआर दर्ज हुई हैं। सरकार ने सीआईडी को जांच सौंपी है। वहीं, असम सिटिज़न्स फोरम ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जिसमें पूर्व पुलिस अधिकारी, न्यायाधीश और वकील शामिल हों।
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एक बागी कलाकार
जुबीन गर्ग सिर्फ गायक नहीं बल्कि असम की आत्मा थे। उन्होंने 40 भाषाओं में करीब 38,000 गाने गाए। हिंदी, असमिया और बंगाली संगीत में उनका बड़ा योगदान रहा। फिल्मों के निर्देशन, अभिनय और लेखन तक में उनका हाथ रहा। वे अपनी बेबाकी और समाजसेवा के लिए भी जाने जाते थे। जरूरतमंदों की मदद करने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से उन्होंने कभी परहेज नहीं किया।
आज जब पूरा असम उन्हें विदाई दे रहा है, तो यह सिर्फ एक कलाकार का जाना नहीं बल्कि एक युग का अंत है।

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