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न्यूयॉर्क के पहले भारतीय मुस्लिम मेयर ज़ोहरन ममदानी पर भारत में मचा राजनीतिक बवाल
भारतवंशी मेयर ज़ोहरन ममदानी ने जीत के बाद दिखाया देशी गर्व, पर पीएम मोदी पर की तीखी टिप्पणी, जिससे मचा सियासी तूफान
न्यूयॉर्क सिटी के नए मेयर ज़ोहरन ममदानी का नाम इन दिनों भारत और अमेरिका दोनों जगह सुर्खियों में है। 34 वर्षीय ममदानी ने पूर्व गवर्नर एंड्रयू क्योमो को हराकर अमेरिका के सबसे बड़े शहर की कमान संभाली है। वे न सिर्फ़ न्यूयॉर्क के पहले भारतीय मूल के मुस्लिम मेयर हैं, बल्कि एक ऐसे परिवार से आते हैं जो कला, समाज और राजनीति तीनों से गहराई से जुड़ा है।
उनकी मां मशहूर फ़िल्म निर्माता मीरा नायर हैं, जिन्होंने Monsoon Wedding, The Namesake और Mississippi Masala जैसी फिल्में बनाई हैं। पिता मह्मूद ममदानी युगांडा मूल के प्रसिद्ध लेखक और समाजशास्त्री हैं। वहीं उनकी पत्नी रमा दुवाजी, सीरियाई मूल की कलाकार हैं, जो प्रवासियों और मध्य-पूर्व के मुद्दों पर काम करती हैं।
‘धूम मचाले’ से लेकर नेहरू तक
अपनी जीत के भाषण के दौरान ममदानी ने एक ओर बॉलीवुड गीत “धूम मचाले” बजवाया, तो वहीं भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का मशहूर भाषण “Tryst with Destiny” भी उद्धृत किया। उन्होंने कहा, “एक ऐसा क्षण आता है जब हम पुराने से नए की ओर कदम बढ़ाते हैं… जब एक राष्ट्र की आत्मा अपनी पहचान पाती है।”

यह बयान भारत में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी तक ने सराहा, जिन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि नेहरू की विचारधारा आज भी दुनिया में सम्मानित है।
मोदी पर ‘फासीवादी’ टिप्पणी और विवाद
हालांकि, ममदानी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बयान काफी विवादित रहा। उन्होंने कहा कि मोदी और बीजेपी का हिंदुत्व केंद्रित विज़न “सिर्फ़ कुछ विशेष भारतीयों” के लिए जगह बनाता है। उन्होंने मोदी को “एंटी-मुस्लिम” और “फासीवादी” बताया।
उनकी इस टिप्पणी पर बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कंगना ने कहा, “ज़ोहरन ममदानी की सोच भारतीय नहीं बल्कि पाकिस्तानी जैसी लगती है।”
बहु-सांस्कृतिक पहचान की झलक
ममदानी की चुनावी मुहिम पूरी तरह दक्षिण एशियाई रंग में रंगी थी। वे हिंदू मंदिरों, गुरुद्वारों और मस्जिदों में जाकर लोगों से जुड़े। उन्होंने अपने वीडियो अभियानों में बॉलीवुड फिल्मों के क्लिप्स और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गजों का ज़िक्र किया।
डेमोक्रेटिक नेता रो खन्ना ने उनकी इस शैली की तारीफ़ करते हुए कहा, “मुझे अच्छा लगा कि ज़ोहरन ने अपनी जड़ों से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने दिखाया कि अपनी पहचान के साथ रहकर भी अमेरिकी राजनीति में सफलता हासिल की जा सकती है।”
आप्रवासियों के समर्थक
उगांडा में जन्मे ममदानी सात साल की उम्र में अमेरिका आए थे। उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान कहा कि वे हमेशा उस न्यूयॉर्क के लिए लड़ेंगे जो ‘प्रवासियों का शहर’ कहलाता है। उनका विज़न मुफ्त बस सेवाएं, किराया स्थिरता और सरकारी ग्रॉसरी स्टोर जैसी नीतियों पर केंद्रित रहा — जो सीधे तौर पर मेहनतकश वर्ग और आप्रवासियों के हितों से जुड़ी हैं।

ट्रंप की आलोचना और ‘चार शब्दों’ वाला जवाब
चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर ममदानी का विरोध किया और उन्हें “कम्युनिस्ट” व “यहूदी-विरोधी” कहा। लेकिन जीत के बाद ममदानी ने मंच से जवाब देते हुए कहा,
“डोनाल्ड ट्रंप, मुझे पता है आप देख रहे हैं — मेरे पास आपके लिए चार शब्द हैं: Turn the volume up!”
उनका यह जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और युवा मतदाताओं में ममदानी का कद और भी बढ़ गया।
भेदभाव के बावजूद जीत की कहानी
9/11 के बाद जिस न्यूयॉर्क में मुसलमानों और दक्षिण एशियाई अमेरिकियों को भेदभाव का सामना करना पड़ा, वहीं आज ममदानी जैसे नेता का मेयर बनना एक ऐतिहासिक क्षण है।
उनकी जीत यह दर्शाती है कि अमेरिका में आज भी विविधता और समावेशिता के लिए जगह मौजूद है — और यही संदेश वे बार-बार दोहरा रहे हैं, “मैंने उस भारत में विश्वास किया जहां हर धर्म, हर समुदाय का समान स्थान था — और मैं वही सोच अब न्यूयॉर्क के लिए लेकर आया हूं।”

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