Sports
विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट नहीं छोड़ा होता? टीम इंडिया की करारी हार के बीच उठे बड़े सवाल
श्रीवत्स गोस्वामी का दावा – कोहली की ऊर्जा, जुनून और विश्वास की कमी से संघर्ष कर रही है टीम इंडिया, दक्षिण अफ्रीका फिर मजबूत स्थिति में
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी टेस्ट में टीम इंडिया की खराब बल्लेबाज़ी और लगातार गिरते विकेटों ने एक बार फिर भारतीय टेस्ट क्रिकेट की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। इसी बीच पूर्व Royal Challengers Bengaluru विकेटकीपर बैटर श्रीवत्स गोस्वामी का बड़ा बयान सुर्खियों में है। उनका कहना है कि विराट कोहली को टेस्ट क्रिकेट जारी रखना चाहिए था और ओडीआई क्रिकेट से संन्यास लेना ज्यादा बेहतर फैसला होता।
गोस्वामी ने अपने आधिकारिक X (Twitter) अकाउंट पर लिखा:
“Ideally, Virat should have left playing ODIs & continued playing Test cricket until he had nothing to give. Test cricket misses him… सिर्फ एक खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि उस ऊर्जा और जुनून के कारण भी, जिसने टीम को हर परिस्थितियों में जीतने का विश्वास दिलाया।”
यह बयान उस समय आया है जब भारत पिछले दो सालों में टेस्ट फ़ॉर्मेट में लगातार संघर्ष कर रहा है। पिछले वर्ष भारत को New Zealand के खिलाफ शर्मनाक टेस्ट सीरीज़ हार मिली थी और अब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी स्थिति खराब होती दिख रही है। यदि ऋषभ पंत की कप्तानी में भारत यह दूसरा टेस्ट हारता है, तो यह लगातार दूसरा घरेलू टेस्ट सीरीज़ हार होगा—जो बेहद दुर्लभ है।
और भी पढ़ें : Bigg Boss 19 में सलमान खान का बड़ा वार: Amaal Mallik की ‘बद्तमीज़ी’ पर फटकार, Shehbaz को कहा ‘चमचा’
मैच का हाल
गुवाहाटी में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 489 रन बनाए और भारत को सिर्फ 201 पर समेट दिया। इसके बाद मेहमान टीम ने दूसरी पारी में बिना विकेट खोए 26 रन बना लिए। अब दक्षिण अफ्रीका कुल 314 रन की बढ़त पर है और मैच पर पूरी पकड़ बनाए हुए है।
दक्षिण अफ्रीका की ओर से सबसे घातक गेंदबाज़ रहे मार्को जानसन जिन्होंने 6/48 के आंकड़े दर्ज किए, जबकि साइमन हार्मर ने तीन विकेट चटकाए।
भारत की ओर से सिर्फ यशस्वी जायसवाल (58) और वॉशिंगटन सुंदर (48) ही संघर्ष कर सके। अंत में कुलदीप यादव ने 134 गेंदों पर 19 रन बनाकर टीम को कुछ देर संभाला और सुंदर के साथ 72 रन की साझेदारी की।

क्या सचमुच कोहली की कमी खल रही है?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट में ना होने से टीम की मानसिकता प्रभावित हुई है। कोहली के कप्तानी दौर में भारत ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी कठिन परिस्थितियों में ऐतिहासिक जीत हासिल की थीं। उनकी नेतृत्व क्षमता, आक्रामक रवैया और फिटनेस संस्कृति ने टीम में अलग ही ऊर्जा भरी थी।
पूर्व खिलाड़ी मानते हैं कि:
- टीम अब उतना आक्रामक नहीं खेलती
- विदेशी पिचों पर विश्वास की कमी दिखती है
- बल्लेबाज़ मानसिक रूप से कमजोर पड़ रहे हैं
कुछ फैन्स ने सोशल मीडिया पर यह भी तुलना की कि कोहली के समय भारत फाइटर मानसिकता दिखाता था, वहीं अब शुरुआती दबाव में ही ढह जाता है।
आगे क्या?
मैच में अभी दो दिन बचे हैं और भारत के लिए वापसी करना लगभग नामुमकिन जैसा लग रहा है। क्रिकेट प्रेमी अब सिर्फ उम्मीद कर रहे हैं कि टीम कम से कम मुकाबला दिखाए और शर्मनाक हार से बच सके।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है—
क्या विराट कोहली का टेस्ट क्रिकेट छोड़ना भारतीय टीम के पतन की शुरुआत थी?
