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लद्दाख हिंसा में बड़ा एक्शन मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक गिरफ्तार
लद्दाख में हिंसक प्रदर्शनों के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने हिरासत में लिया, NGO का FCRA लाइसेंस भी रद्द।
लेह-लद्दाख में हाल ही में भड़की हिंसा ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस हिंसा में चार लोगों की मौत और करीब 70 लोग घायल हुए। अब इस मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया है।
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हिंसा के दौरान गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया था। यहां तक कि BJP दफ्तर को भी आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने सख्त रवैया अपनाते हुए वांगचुक के NGO Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh (SECMOL) का विदेशी फंड से जुड़ा लाइसेंस भी रद्द कर दिया।
सरकार का कड़ा कदम
गुरुवार को केंद्र सरकार ने न सिर्फ SECMOL का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द किया, बल्कि वांगचुक पर विदेशी फंडिंग कानून के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। सरकार का कहना है कि NGO बार-बार नियम तोड़ते हुए विदेशी चंदा प्राप्त कर रहा था।

वांगचुक का बयान
गिरफ्तारी से पहले NDTV से बातचीत में सोनम वांगचुक ने आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा –
“यह समय इल्ज़ाम-इल्ज़ाम खेलने का नहीं, बल्कि बैठकर समस्या का हल निकालने का है। यहां लोगों की मौतें हुई हैं, आंसू भी नहीं सूखे और हम राजनीति कर रहे हैं। इस तरह के आरोप युवाओं को और भड़काएंगे।”
क्यों भड़की हिंसा?
लद्दाख में यह विरोध लंबे समय से चल रही मांगों के कारण भड़का। सोनम वांगचुक और कई अन्य संगठनों की ओर से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत विशेष संरक्षण देने की मांग की जा रही थी। वांगचुक 10 सितंबर से अनशन पर भी बैठे थे, लेकिन 18 सितंबर को अचानक हिंसा भड़क उठी और हालात बेकाबू हो गए।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख में हुआ था। उन्होंने NIT श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। वांगचुक न सिर्फ एक पर्यावरण कार्यकर्ता बल्कि एक शिक्षक और इंजीनियर भी हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में SECMOL की स्थापना की, जिसका उद्देश्य लद्दाखी युवाओं को आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ना है।
साथ ही उन्होंने ‘आईस स्तूपा’ जैसी परियोजनाओं के जरिए ग्लेशियर पिघलने और जल संकट जैसी समस्याओं का अभिनव समाधान भी प्रस्तुत किया।
आगे क्या?
वांगचुक की गिरफ्तारी और NGO पर की गई कार्रवाई ने लद्दाख की राजनीति को और गरमा दिया है। समर्थकों का कहना है कि यह कदम आंदोलन को दबाने की कोशिश है, जबकि सरकार का दावा है कि कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि अदालत इस मामले को किस तरह लेती है और क्या लद्दाख की जनता की आवाज़ को नई दिशा मिलेगी।

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