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रोहित–द्रविड़ की जोड़ी ने बदल दिया टीम इंडिया का खेल, अश्विन ने खोला बड़ा राज़
पूर्व स्पिनर आर. अश्विन ने बताया कैसे रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ ने टीम इंडिया के व्हाइट-बॉल क्रिकेट में ला दी आक्रामक क्रांति
भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ सालों में जिस आक्रामक बैटिंग अप्रोच ने पूरी दुनिया को हैरान किया है, उसका श्रेय पूर्व कप्तान रोहित शर्मा और पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ को जाता है। यह बात सामने लाई है टीम इंडिया के दिग्गज ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने, जिन्होंने अपने YouTube शो ‘Ash Ki Baat’ में टीम इंडिया की इस क्रांतिकारी बदलाव की कहानी साझा की।
“सिर्फ बोला नहीं, खुद करके दिखाया” – अश्विन
अश्विन के मुताबिक, द्रविड़ और रोहित दोनों ने न सिर्फ टीम से तेजी से खेलने की बात कही, बल्कि खुद मैदान पर उसी आक्रामक सोच का उदाहरण भी पेश किया।
उन्होंने कहा:
“राहुल भाई ने रास्ता दिखाया और रोहित ने उसे निभाया। आज भारत की बैटिंग एवरेज नहीं, बल्कि स्ट्राइक रेट से पहचानी जाती है।”
बदलाव की शुरुआत – ICC हार के बाद नई सोच
2019 वर्ल्ड कप हो या 2021 T20 वर्ल्ड कप—इन ICC टूर्नामेंट्स के बाद आलोचना का दौर भारी था। लेकिन 2023 ODI वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने जो आक्रामक अप्रोच अपनाई, वह साफ दिखा गया कि टीम बदल चुकी है।
लीग स्टेज में भारत का रवैया बिल्कुल “हम दबाव बनाएंगे, बचेंगे नहीं” वाला था।
बाद में, 2024 T20 वर्ल्ड कप जीत ने इस बदलाव को मजबूत कर दिया।
नए उदाहरण: गिल–सूर्यकुमार–ईशान की fearless पीढ़ी
इस नई सोच का असर युवा खिलाड़ियों पर भी दिखा।

शुभमन गिल ने पावरप्ले में स्ट्राइक रेट 150+ अप्रोच अपनाई।- सूर्यकुमार यादव ने 360° गेम से T20 क्रिकेट की परिभाषा बदल दी।
- ईशान किशन ने fearless intent को सबसे बेहतर तरीके से अपनाया।
यही नहीं, घरेलू क्रिकेट में उभरते बल्लेबाज जैसे यश धोरोत, आयुष म्हात्रे, और हरीश पाटिल को भी इसी approach के कारण तेज़ी से मौके मिल रहे हैं—यानी नई सोच, नए चेहरों को आगे ला रही है।
‘रोहित–विराट को अब जितना देख सकते हो, उतना देख लो’ – भावुक हुए अश्विन
अश्विन ने भावनात्मक अंदाज़ में कहा कि
“कितना समय है हमारे पास विराट कोहली और रोहित को देखने का? बहुत कम। जब ये दोनों चले जाएंगे तब हम फिर यही कहेंगे — ‘उसे वापस लाओ।’ इसलिए अभी का हर पल एन्जॉय कीजिए।”
इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी खूब भावनाएं जगाईं। कई फैंस ने लिखा कि यह वही दौर है, जिसे आने वाले समय में ‘गोल्डन एरा ऑफ इंडियन बैटिंग’ कहा जाएगा।
आगे क्या?
अब जबकि रोहित–द्रविड़ का युग समाप्त हो चुका है और भारतीय क्रिकेट नए नेतृत्व की तलाश में है, सवाल फिर वही है—
क्या आने वाली पीढ़ी इस आक्रामक सोच को और ऊंचाई पर ले जाएगी?
फिलहाल, फैंस बस यही चाहते हैं कि
इन दोनों महान खिलाड़ियों की बैटिंग और नेतृत्व का हर पल यादगार बने।
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