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Health

नींद की गोली नहीं, आदत बदलना है असली इलाज: 40 साल की महिला हुई बेहोश, डॉक्टर ने बताया असली कारण

सिर्फ Melatonin सप्लीमेंट लेने से नहीं सुधरती नींद — तनाव, अनियमित दिनचर्या और स्क्रीन टाइम बन रहे हैं दिल की बीमारियों के सबसे बड़े दुश्मन

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Melatonin for sleep: Why sleep habits matter more than supplements for heart health | Dainik Diary
Melatonin से नहीं, बेहतर नींद की आदतों से सुधरता है दिल और दिमाग — डॉक्टरों ने दी चेतावनी।

दिल की सेहत को लेकर हम अक्सर डाइट, एक्सरसाइज़ और दवाइयों पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक चीज़ को नज़रअंदाज़ कर देते हैं — नींद। हाल ही में एक 40 वर्षीय महिला को दिल्ली के एक क्लिनिक में अचानक OPD में बेहोश होते देखा गया। डॉक्टरों को पहले लगा कि यह कोई आपात स्थिति है, लेकिन कुछ ही सेकंड में वह जाग गईं। जांच करने पर पता चला कि वह ‘माइक्रो-स्लीप’ में चली गई थीं — यानी कुछ सेकंड्स के लिए उनका दिमाग अचानक बंद हो गया था।

महिला की रिपोर्ट में पाया गया कि उनका ब्लड प्रेशर 175/110 mmHg, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल बहुत ज़्यादा था, और उनका वजन भी सामान्य से अधिक था। लेकिन इन सभी का मूल कारण एक ही था — रात में सिर्फ चार घंटे की नींद

जब डॉक्टर ने पूछा कि वह नींद के लिए क्या कर रही हैं, तो उन्होंने कहा —

“मैं रोज़ाना Melatonin की गोली लेती हूँ, फिर भी नींद नहीं आती।”

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Melatonin कोई जादुई समाधान नहीं

डॉक्टरों का कहना है कि Melatonin सप्लीमेंट हर व्यक्ति के लिए काम नहीं करता। यह सिर्फ उन लोगों में असरदार होता है जिनमें नींद की समस्या शरीर में इस हार्मोन की प्राकृतिक कमी से जुड़ी हो।
अगर किसी को नींद की कमी तनाव, हार्मोनल असंतुलन या लाइफस्टाइल के कारण है, तो यह गोली बिल्कुल काम नहीं करती।

इसके अलावा, बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट्स की गुणवत्ता समान नहीं होती, और लंबे समय तक इनका सेवन दिल, लीवर और हॉर्मोनल संतुलन पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

हाल में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के एक अध्ययन में पाया गया कि एक साल से अधिक समय तक Melatonin लेने वाले मरीजों में हार्ट फेलियर और हॉस्पिटलाइजेशन का ख़तरा बढ़ जाता है। यानी यह गोली दिल की बीमारियों से बचाव नहीं, बल्कि जोखिम बढ़ा सकती है।

नींद और दिल का गहरा रिश्ता

नींद सिर्फ थकान मिटाने के लिए नहीं होती, यह हार्ट की रिकवरी और ब्लड प्रेशर को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब हम गहरी नींद में जाते हैं, तो ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट कम हो जाता है, जिससे दिल को आराम मिलता है।
लेकिन अगर कोई व्यक्ति हर दिन सिर्फ 4-5 घंटे सोता है, तो यह हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

डॉक्टरों के मुताबिक, नींद की कमी से शरीर में कॉर्टिसोल नामक तनाव हार्मोन बढ़ जाता है, जो दिल पर दबाव डालता है। वहीं, लेप्टिन और घ्रेलिन जैसे हार्मोन जो भूख और तृप्ति को नियंत्रित करते हैं, वे असंतुलित हो जाते हैं, जिससे वजन बढ़ता है और डायबिटीज़ का खतरा बढ़ता है।

नींद की कमी से सूजन और इम्यूनिटी पर असर

कम नींद शरीर में सूजन बढ़ाती है, जिससे धमनियाँ सख्त होती हैं और रक्त प्रवाह बाधित होता है। यही सूजन आगे चलकर हार्ट रिद्म डिसऑर्डर (arrhythmia) और ब्लॉक्ड आर्टरीज़ जैसी समस्याओं को जन्म देती है।
नींद हमारी इम्यून कोशिकाओं को सक्रिय रखती है और शरीर को संक्रमणों से लड़ने के लिए तैयार करती है।

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जब आदतों ने बदली ज़िंदगी

डॉक्टर ने बताया कि जिस महिला का इलाज किया गया, उसने अपनी दिनचर्या में कुछ सरल बदलाव किए —

  • शाम 4 बजे के बाद चाय-कॉफी बंद कर दी।
  • रात का खाना 7:30 बजे से पहले ले लिया।
  • रात 10 बजे के बाद स्क्रीन टाइम पूरी तरह बंद कर दिया।
  • सोने से पहले किताब पढ़ना और अपने विचार लिखना शुरू किया।

कुछ ही हफ्तों में उसका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल सामान्य हो गया, वजन कम हुआ और चिंता घट गई।

सीख क्या है?

हम अक्सर सोचते हैं कि काम पूरा करने या सोशल मीडिया देखने के लिए नींद कम लेना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन यही लापरवाही धीरे-धीरे शरीर को खोखला करती है।
सप्लीमेंट्स, दवाइयाँ या जादुई उपाय नहीं — नींद की आदतें बदलना ही असली इलाज है।

अधिक अपडेट के लिए http://www.dainikdiary.com