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अनुपम खेर ने किया दर्दनाक खुलासा ‘तन्वी द ग्रेट’ की असफलता ने मुझे तोड़ दिया ‘सैयारा’ ने छीन ली चमक
अनुपम खेर बोले 4 साल की मेहनत और ड्रीम प्रोजेक्ट एक फिल्म की वजह से हुआ फ्लॉप, डिप्रेशन में चला गया था
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने हाल ही में अपने करियर के एक बेहद दर्दनाक दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि उनका ड्रीम प्रोजेक्ट तन्वी द ग्रेट बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गया क्योंकि उसी दिन रिलीज हुई यशराज फिल्म्स की सैयारा ने दर्शकों का पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
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4 साल की मेहनत पर पानी फिर गया
एक इंटरव्यू में अनुपम खेर ने कहा, “मैंने इस फिल्म पर चार साल लगाए, एक साल लिखने में, एक साल संगीत तैयार करने में। मैंने इसे लिखा और निर्देशित किया। लेकिन जिस दिन इसे रिलीज़ किया, उसी दिन यशराज फिल्म्स की सैयारा भी रिलीज़ हुई और मेरी फिल्म पूरी तरह दब गई। यह मेरे लिए बहुत दुखद था। मैं डिप्रेशन में चला गया।”
रिलीज़ से पहले आर्थिक संकट
अनुपम खेर ने खुलासा किया कि रिलीज़ से एक महीने पहले फिल्म के फाइनेंसर गायब हो गए। तब उन्होंने अपने दोस्तों—डॉक्टर्स, वकीलों से पैसे लेकर फिल्म पूरी की। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ, न्यूयॉर्क में मशहूर अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो ने भी फिल्म देखी और भारत के राष्ट्रपति को भी दिखाई गई। लेकिन थिएटर में दर्शक इसे नकार गए।

दर्शकों ने चुनी प्रेम कहानी
अनुपम ने कहा, “सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन दुनिया एक लव स्टोरी देखना चाहती थी। लंबे समय से कोई यूथफुल रोमांटिक फिल्म नहीं आई थी। थिएटर वाले भी हिट फिल्म को स्क्रीन देते हैं और बाकी फिल्में हट जाती हैं। यही वजह रही कि तन्वी द ग्रेट असफल हो गई।”
सैयारा की अप्रत्याशित सफलता
निर्देशक मोहित सूरी की सैयारा में नए कलाकार अनीत पड्दा और आहान पांडे थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 569.75 करोड़ रुपये की कमाई कर गई। जबकि तन्वी द ग्रेट केवल 2.54 करोड़ रुपये ही कमा सकी।
परिवार जैसा रिश्ता
अनुपम खेर ने यह भी कहा, “सैयारा की सफलता ने सबको चौंकाया। शायद आदित्य चोपड़ा भी हैरान रह गए होंगे। शुक्र है कि आदित्य और यश चोपड़ा मेरे परिवार जैसे हैं, वरना यह और भी ज्यादा दर्दनाक होता।”
फिल्म में शामिल कलाकार
तन्वी द ग्रेट में अनुपम खेर के साथ बोमन ईरानी, जैकी श्रॉफ, करन टक्कर और शुभांगी दत्त जैसे कलाकार नजर आए। लेकिन सितारों की यह टोली भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक नहीं खींच पाई।
अनुपम खेर की यह स्वीकारोक्ति बताती है कि फिल्म इंडस्ट्री में मेहनत और लगन के बावजूद सफलता की गारंटी नहीं होती। कभी-कभी दर्शकों की पसंद और समय ही तय कर देता है कि कौन सी फिल्म इतिहास रचती है और कौन सी गुमनामी में खो जाती है।
